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विश्व में दिमाग की बीमारियों से 97 करोड से ज्यादा लोग जूझ रहे हैं|


विश्व में बढ़ती दिमाग की बीमारियों पर चिंता पैदा हो रही है ग्लोबल डिसीज प्रोजेक्ट के अनुसार पूरी दुनिया में लगभग 97 करोड 70 लाख व्यक्ति इन 12 मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं|"

2022-09-25 06:58:31

विश्व में बढ़ती दिमाग की  बीमारियों पर चिंता पैदा हो रही है ,ग्लोबल डिसीज प्रोजेक्ट के अनुसार पूरी दुनिया में लगभग 97 करोड 70 लाख व्यक्ति इन 12 मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं जैसे कि ब्रेन स्ट्रोक डिमेंशिया माइग्रेन पार्कीन्संस मिरगी और दिमाग की चोट से न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से लोग मानसिक तौर पर बीमार हो रहे हैं यह समस्या बुजुर्गों की आबादी के बढ़ने से यह बीमारी हर जगह  बदतर होती जा रही है |

1990 के बाद  दिमाग की बीमारियों में 48 परसेंट बढ़ोतरी हुई आपको बता दें कि दिमाग एक पेचीदा अंग है इसी कारण रहस्य को बताना मुश्किल हुआ है
कुछ बीमारियों का इलाज  खोजने पर आई परेशानी मायूस कर देती है  प्राइवेट से अल्जाइमर बीमारी पर रिसर्च करने पर 1998 से 2017 तक इस पे खर्चा 3.48 लाख करोड़  हुई जिसका परिणाम कुछ भी हाथ नहीं लगा  इसी  नाकामी के कारण 2010 में कई दवा कंपनियों ने न्यूरोसाइंस का रिसर्च बंद कर दिया कुछ बड़ा दवा कंपनियां इसमें न्यूरोसाइंस पर अपना  दावेदारी दिखाई जिनको परिणाम स्वरूप कुछ बदलाव का संकेत मिले हैं कई तरह के तकनीकी से इसे आगे बढ़ाया गया ह
 जानवरों के दिमाग पर इस्तेमाल आप्टोजेनेटिक्स टेक्नोलॉजी और छोटे दिमाग जैसे ऑर्गेनाइज का विकास से न्यूरोसाइंस में बदलाव हुआ है बीमारी कम होने या बढ़ने का पता बायोमार्कर से होता है |

दिमाग के बीमारियों के जैविक कारण को जानने के लिए डाटा का विश्लेषण  सहायक साबित हुआ है यूके बायोबैंक हे क्या एक से ज्यादा पीढ़ी के लाखों लोगों पर नजर रख सकता है इससेदिमाग की  बीमारियों के जड़ों तक  पहुंचने मेंसहायक होगी दिमाग की अंदरूनी बीमारियों के गतिविधियों को जानने के लिए शोधकर्ता ने कॉफी दिलचस्पी दिखाई है|

रोमांचक बात यह है कि दिमाग हद तक प्लास्टिक के बराबर है जिससे दिमाग के बीमारियों का इलाज हो सकेगी दिमाग के बीमारियों का इलाज नए तरीके से हो इसके लिए न्यूरो इम्युनोलॉजी शामिल होंगे।