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क्या बढ़ती जनसंख्या मानव जीवन के लिए खतरा है। बढ़ती जनसंख्या से होने वाली समस्याएं और उनका निवारण।

देश की आबादी आए दिनों बढ़ती जा रही है। सरकार इसे रोकने के लिए कई सारे पहलुओं को शुरू किया है पर फिर भी इस पर अभी तक काबू नहीं हो पाया है। 

देश की आबादी आए दिनों बढ़ती जा रही है। सरकार इसे रोकने के लिए कई सारे पहलुओं को शुरू किया है पर फिर भी इस पर अभी तक काबू नहीं हो पाया है। ऐसा इसलिए है कि लोग  यहां सरकार से ज्यादा अपने मानसिक विचारो को मान देते हैं। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में जन्म दर मृत्यु दर से कम हो, परंतु वर्तमान समय में भारत में जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हैं। अगर जन्म दर और मृत्यु दर में समानता आ गई तो जनसंख्या भी स्थिर हो जाएगा, पर यह उतना ही मुश्किल है जितना की तिनके के सहारे चट्टान को हिलाना। बढ़ती जनसंख्या न केवल भारत की समस्या है बल्कि यह उन सभी देशों के लिए भी है जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है।
आज हम सरकार द्वारा चलाए गए मिशनों का मजाक बना देते है और खुद को उनके विचारों से अधिक समझदार समझने लगते है, पर यह सबसे बड़ी मूर्खता है। हम सब को इसके लिए पहले से ही सचेत रहना होगा। यह मानव जाति के साथ-साथ पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणियों के लिए खतरा है। बढ़ती जनसंख्या का आने वाले समय में कैसा असर होगा इसके बारे में हम आगे विस्तार से जानेंगे।


•बढ़ती जनसंख्या से होने वाली समस्या :

(1) पर्यावरण प्रदूषण
(2) ओजोनपरत को हानि
(3) पारितंत्रीय समस्या
(4) ब्रम्हांडीय तापमान का बढना
(5) प्राकृतिक संसाधनो का दोहन
(6) स्वास्थ्य संबंधीं समस्याएं
(7) गरीबी तथा बेकारी
(8) नैतिक मूल्यो का पतन तथा अपराध में वृद्धि।


1). पर्यावरण प्रदूषण :

• वायु प्रदूषण -  विकसित तकनीक ने मानव को इतना विकसित कर दिया है कि वे अपने सुख सुविधा के लिए विभिन्न प्रकार के खोज करते रहते है। आज हर एक व्यक्ति के पास वाहन है चाहे वह दो पहिए वाला हो या चार पहियों वाला। वही उद्योग के परिचालन को तीव्र करने के लिए विभिन्न प्रकार के वाहनों का उपयोग हो रहा है। ये सभी गाड़ियां पेट्रोल या डीजल से चलती है और जब इन गाड़ियों के इंजनों में पेट्रोल, डीजल का दहन होता है तो उनमें लगे सलेंसर से धुआं निकलता है जो वातावरण में फैल कर वायु को दूषित कर देता है। साथ ही विभिन्न प्रकार के फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुआं भी वायु को जहरीली बना रही है। इसके अलावा भी मनुष्य अपने मनोरंजन और विभिन्न प्रकार के प्रयोग के लिए अनेक प्रकार के वस्तुओ को जला कर वायु को प्रदूषित कर रहे हैं। अधिकांश जनसंख्या शहरों में निवास करती है वहा उनके द्वारा फेके गए कचरों का प्रबंधन करना कठिन है इसलिए उन्हें शहर से दूर लाकर जला दिया जा रहा है जिससे वायु दूषित हो रही है। जनसंख्या बढ़ने के कारण इन सभी में वृद्धि होगी और वायु और भी प्रदूषित हो जाएगा। एक दिन ऐसा आ जायेगा की वायु पूर्ण रूप से प्रदूषित हो जायेगी और यहां रहने वाले प्राणियों को सांस लेने में कठिनाई होने लगेगी जिससे सभी दम घोट कर मर जायेंगे।

• जल प्रदूषण -  आज की अधिकांश जनसंख्या शहरों में निवास करती है वहा उनके द्वारा फेके गए कचरों का प्रबंधन करना कठिन है इसलिए उन्हें नलों और वाहनों के जरिए नदियों, तालाबों, नहरों आदि में फेक दिया जा रहा है जिससे जल का प्रदूषण हो रहा है। मानव के जरूरतों को पूरी करने वाली कंपनी, फैक्ट्रियों आदि में उत्पादन के फलस्वरूप निकले हुए अपशिष्ट पदार्थ को जल में विसर्जित कर दिया जाता है जिससे जल अत्यंत दूषित होते जा रहा है।  दूषित जल से विभिन्न प्रकार के जीवाणु उत्पन्न होते हैं जो विभन्न प्रकार के बीमारियो को फैलाते है और इसमें वृद्धि होना भी मानव जीवन के लिए हानिकारक है।

• ध्वनि प्रदूषण :- संघर्ष में डूबा मनुष्य ने खुद को मनोरंजित करने के लिए बड़े बड़े लाऊड स्पीकर का उपयोग कर संगीत सुनते है। पर्व त्यहारों में और बहुत सारे खुशी के पलों में बजाए जाने वाले स्पीकरो से निकलने वाली ध्वनि तथा फैक्ट्रियों आदि में उपयोग किए जाने वाले मशीनों के चलने की आवाज के साथ-साथ सड़को पे चलने वाली वाहनों से उत्पन्न हुई अवश्रव ध्वनि ही "ध्वनि प्रदूषण" है। यह वायुमंडल में विक्षोभ उत्पन्न करता है जिससे पृथ्वी को रक्षा प्रदान करने वाली ओजोन परत में छिद्र हो रहा है और अगर इसी प्रकार से ध्वनि से उत्पन्न ग्लोबल वार्मिंग बढ़ता रहा तो ओजोन परत एक दिन पूर्ण रूप से हट जाएगा फिर धरती के सभी जीव-जंतु सूर्य के खतरनाक किरणों से मरने लगेंगे।

• मिट्टी प्रदूषण :- इंसानों द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले प्लास्टिक के थैले आदि मिट्टी के उर्वरता को नष्ट कर देती है। जब इंसान उनका एक बार उपयोग कर लेते है तो उन्हें इर्द-गिर्द फेंक देते हैं। प्लास्टिक के बने थैले जमीन में जाकर बैठ जाते है और चुकी यह अनाविकारीणीय होने के कारण ना ही सड़ता है और ना ही गलता है और एक जगह स्थिर रह कर उस जगह के मिट्टी के उर्वरता को नष्ट कर देता है। इस प्रकार जब आबादी बढ़ेगी तो उनका उपयोग भी बढ़ता जायेगा और धरती की उर्वरता ऐसे ही नष्ट होती गई तो एक दिन ऐसा आएगा की धरती के किसी भी भाग पर फसल उगाना मुश्किल होगा फिर इंसान भूख से मरने लगेंगे।


2). ओजोनपरत को हानि :

    वर्तमान में मौजूद जनसंख्या से ही पृथ्वी पर ग्लोबल वार्मिंग काफी बढ़ गया है वैज्ञानिक और सरकार मिलकर विभिन्न उपायों को बना कर इन्हें कम करने में लगे है। पर इंसान खुद के मनोरंजन से कभी बाहर आ कर सोचता ही नही है। उनके द्वारा किए जाने वाले अनेक क्रियाकलापों से धरती पर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रहा है। जैसा कि आपने उपर पढ़ा की ध्वनि प्रदूषण से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रहा है और यह ओजन परत के लिए खतरा है। इसके साथ-साथ इंसान अपने सुविधा और सुखमय जीवन के लिए कई सारे अविष्कार किए है जिनसे क्लोरो- फ्लोरो कार्बन नामक गैस निकलती है जैसे हम फ्रिज का उपयोग देख सकते है। ये गैस वायुमंडल से उपर उठ कर ओजोन परत के पास चला जाता है फिर ओजोन में मिल कर ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर एक अन्य यौगिक बना लेता है जिससे ओजोन की परत कमजोर होती है और उसमें छिद्र होने लगता है। इस तरह जब जनसंख्या में वृद्धि होगी तो उनके इस तरह के उपयोग से ओजोन परत और कम समय में कमजोर हो जायेगी और एक दिन ऐसा आएगा की ओजोन परत पूर्ण रूप से खत्म हो जायेगी और सूर्य के प्रकाश से निकलने वाली प्रबैगनी किरणे धरती पर सीधी आयेगी और तरह-तरह के बीमारी फैला देगी जिससे यह रहने वाले जीव- जंतु सभी मीट जायेंगे।


3) पारितंत्रीय समस्या :

 हम सभी जानते है की जल मंडल, स्थल मंडल और वायु मंडल मिलकर परितंत्र का निर्माण करता है। अगर जनसंख्या में वृद्धि इसी गति से होती रही तो उतनी बड़ी आबादी के रहने के लिए अस्थल कम पड़ने लगेंगे, जल की भी समस्या होगी। उपर जैसा हमने पढ़ा है कि पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है ऐसी स्थिति में तीनों भाग प्रदूषित होगा तो परितंत्र के लिए समस्या है। परितंत्र में रहने वाले जीवों के लिए भी यह समस्या काफी गंभीर होगी।


4) ब्रम्हांडीय तापमान का बढना :
  
  बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग से ब्रह्माण्ड में तापमान काफी बढ़ रहा है और ब्रह्मांड के तापमान बढ़ने से उसके स्थिति में विचलन होने की समस्या है। जनसंख्या बढ़ने के साथ कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि होगी जिससे वायुमंडल का तापमान काफी बढ़ेगा और वायुमंडल के ताप बढ़ने से ब्रह्माण्ड भी गर्म होगा। इससे संभावित: होनेवाली समस्या यह है कि  पिंडों के बीच लगने वाले ब्रह्मांडीय बालों में अंतर आ जाते जिससे ब्रह्माण्ड का संतुलन बिगड़ा जायेगा।


5) प्राकृतिक संसाधनो का दोहन:

प्राकृतिक से प्राप्त वह सारी चीज़े जो मानव के जरूरतों की पूर्ति करता है, संसाधन कहलाता है। इन प्राकृतिक संसाधनों का भंडार सीमित है और आज हमने इनका उपयोग इतना कर लिया है की आने वाली पीढ़ी के लिए इसके खत्म होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में अगर जनसंख्या इसी गति से बढ़ती रही तो इन संसाधनों का उपयोग भी काफी होगा और भविष्य में आने वाले पीढ़ियों के लिए यह खत्म हो जाएगा।

6) स्वास्थ्य संबंधीं समस्याएं :

आज बीमार पड़ने पर जब कोई अस्पताल जाता है तो उन्हें वहां भर्ती करने के लिए जगह नहीं मिलता है। कभी कभी इसी कारण से इंसान की मौत हो जाती है। यह समस्या बस इन विशाल आबादी के कारण ही है। आज हमने पर्यावरण दूषित कर खुद के लिए खतरा बना लिया है तो अब ऐसी हाल में इंसान बीमार होगा तो भारत में इलाज की पूर्ति बहुत ही कम है। एक ऑपरेशन कराने के लिए कई दिनों का अपॉइंटमेंट लेना होता है, और आबदी के बढ़ने से ये समस्या उनके साथ ही आगे बढ़ती रहेगी। 

7) गरीबी तथा बेकारी :

   जनसंख्या बढ़ने से प्रति व्यक्ति आय में कमी आती है। इस तरह अगर जनसंख्या में वृद्धि हुई तो स्वाभाविक सी बात है की गरीबी और बेकरी की समस्या आएगी। ऐसी स्थिति में यहां रोजगार कम हो जाएंगे और लोगो की आय भी कम होगी फिर महंगाई बढ़ने से लोग भूख से मरने लगेंगे। बढ़ती आबादी से यहां गरीबी और बेकरी भी जन्म लेगी। 

8) नैतिक मूल्यो का पतन तथा अपराध में वृद्धि :

जब प्रति व्यक्ति आय कम होगी और बेरोजगारी आ जायेगी तो लोग अपराध की राह पकड़ लेंगे। एक इंसान दूसरे इंसान को मार काटने की भावना रखेगा। लोग कमाने के जगह लूट कर धन आदि लेना चाहने लगेंगे। जब गरीबी और महंगाई उन्हे भूख से मरने के हाल में ला देगी तो खुद को जीवित रखने के लिए दूसरे को मरना शुरु कर देंगे। इस तरह यहां इंसानों के नैतिक मूल्यों का पतन होगा और अपराध में वृद्धि होगी।


•समस्याओं का हल :

 बढ़ती आबादी से होने वाली समस्या का केवल एक ही हल है और वह है जनसंख्या नियंत्रण। हम और आपको को मिलकर जनसंख्या वृद्धि को रोकना होगा। इसका यह तात्पर्य है कि जनसंख्या नियोजन के उपायों को लोगो तक पहुंचाना होगा। "हम दो और हमारे दो" वाले विचारो को हमे और अन्य लोगो के मन में बैठना होगा। लोगो को बताना होगा की अगर उनके पास दो बेटियां है तो वही काफी है दुनिया को बदलने के लिए बेटे के आस में खुद के परिवार को विनाश की तरफ न लेकर जाए।  गर्भ धारण को रोकने वाले दवाओं तथा अन्य चीजों को अपनाना होगा। लोगो को बढ़ती जनसंख्या से होने वाली समस्या से परिचित कराना होगा , तब जाकर हम कहीं एक विकसित देश और दुनिया बना पायेंगे।