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फैला रही शिक्षा का प्रकाश ओडिशा के कटक की भानुप्रिया की कहानी

भानुप्रिय के पिता का सपना था कि हर ब्च्चें को  शिक्षा मिले . और इसलिये भानुप्रिया चाय कि टपरी चलाते हुए एक स्कुल खोला जिसमें आस - पास के जरुरतम्नद ब्च्चों को शिक्षा देना शुरु किया था 

यह कहानी है , उडिसा के कटक डी प्रकाश राव की बेटी भानुप्रिया की । जो कि लगभग  50 साल से डी प्रकाश राव द्वारा सड़क के किनारे चाय की दुकान लगाना शुरु किया गया था . ओडिशा  के कटक की भानुप्रिया जिसका उम्र  28 है .
भानुप्रिय के पिता का सपना था कि हर ब्च्चें को  शिक्षा मिले . और इसलिये भानुप्रिया चाय कि टपरी चलाते हुए एक स्कुल खोला जिसमें आस - पास के जरुरतम्नद ब्च्चों को शिक्षा देना शुरु किया था . भानुप्रिया के इस पहल को देखते हुए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने भानुप्रिया की तरिफ़ करते हुए  2019 में पद्मश्री अवर्ड से सम्मानित किया थाअ . और उसके करीब डेढ़ साल बाद भानुप्रिया के पिता  को ब्रेन स्ट्रोक आया  और डी प्रकाश राव की मृत्यू हो गयी . और भानुप्रिया अपने पिता के सपनों को पुरा करने मे जुट गयी । 


क्यों और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत .

भानुप्रिया के पिता डी प्रकाश राव की स्थिती इतनी दयनीय थी , वो प्राइमरी तक भी अपनी शिक्षा पुरी नहीं कर पाये थें . सरकारी स्कुल थोड़ा दुर होने के कारण डी प्रकाश के घरों के बच्चें स्कुल नहीं जाया करते थें . वर्ष 2000 में डी प्रकाश राव ने एक छोटी सी शुरुआत की , वह अपने आस - पास के कुछ बच्चों को  अपने घर पर बुला कर शिक्षा देनी शुरु कर दी .जब धिरे-धिरे और बच्चें आने लगे तो डी प्रकाश राव ने अपनी दुकान से होने वाली कमाइ को जोड़कर डी प्रकाश राव ने  आशा-आश्वासना’ नाम से 2005 में , एक स्कूल खोला था। जिस स्कूल में  गरीब के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देने की पहल शुरू की गई थी । डी प्रकाश राव ने अपने चाय के दुकान से आने वाले कमाइ से ही स्कूल को चला रहे थें . भले ही  डी प्रकाश राव के पास बच्चों को शिक्षा के अलावा जैसे कॉपी, किताब पेंसिल,ड्रेस इत्यदी मुफ़्त मे ही देते थे.लेकिन डी प्रकाश राव अपने स्कूल के शिक्षको को वेतन भी दिया करते थें .

डी प्रकाश राव की इस निःस्वार्थ सेवा की चर्चा फैली तो ओडिशा के कुछ सामाजिक संगठन आगे आए और अनाज तथा किताब-कॉपी दान में देने लगे। और फिर  65-70 बच्चों ने स्कूल में दाखिला ले लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2018 में कटक दौरे पर गए तो प्रकाश से मिले और उनके काम की प्रशंसा की। 2019 में भारत सरकार की तरफ से उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। लेकिन, कहते हैं न कि अच्छे लोगों की जरूरत ईश्वर को भी होती है। पद्मश्री मिलने के कुछ महीने बाद ही उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया और उनकी तबीयत खराब रहने लगी थी । और चाय की दुकान भी बंद हो गई थी। आखिरकार 13 जनवरी 2021 को डी प्रकाश राव स्वर्ग सिधार हो गये । 

भानुप्रिया ने पुरा किया अपने पिता का सपना 

   भानुप्रिया कहती है , कि मेरे पिता डी प्रकाश राव अपने शिक्षा को ही सफलता मानते थें  . सरकार या अन्य किसी  का भी  मदद नहीं मिलती है . प्रकाश ने बेटी भानुप्रिया को भी खूब पढ़ाया। भानु ने दिल्ली में रहकर होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने सिंगापुर और ऑष्ट्रेलिया में जॉब की। दिल्ली में अच्छी नौकरी मिलने पर वो वापस आ गई। लेकिन 2019 में पिता की तबीयत बिगड़ी तो भानुप्रिया ने  नौकरी छोड़ के कटक में लौटना पड़ा। और इसलिये भानुप्रिया स्कूल चलाने और पिता की देखभाल के लिए  कटक में ही रुक गईं थी।

भानुप्रिया ने भले ही विदेश की अपनी नौकरी छोड़नी पड़ गयी , लेकिन वह अपने पिता के सपने को अधूरा नहीं छोड़ना चाहती थीं। चाय की दुकान तो बंद हो चुकी थी और पिता के गुजरने के बाद मदद करने वालों ने भी मदद करने से अपना हाथ खींच लिया था। लेकिन भानुप्रिया ने हार नहीं मानी और भानुप्रिया ने अपनी और अपने पिता के बचत के पैसे से स्कूल चलाना जारी रखा। और भानुप्रिया वह खुद भी वहां उस स्कूल मे पढ़ाने लगीं थी ।भानुप्रिया मां पी विजयलक्ष्मी के साथ वह दुकान भी संभाल रही थी । वह रोजाना सुबह 5 बजे दुकान जाती हैं और 9 बजे तक रहती हैं। वहां से सीधे स्कूल जाती हैं और बच्चों को पढ़ाती हैं। और दोपहर 2 बजे तक स्कूल में पढ़ाने के बाद घर जाती हैं। शाम 4 से 7 बजे तक फिर दुकान चलाती हैं। उसके बाद रात 9 बजे तक मां और चचेरा भाई राकेश दुकान संभालते हैं। भानु कहती हैं, “दुकान से रोजाना 400-500 रुपए की कमाई हो जाती है। लेकिन वह स्कूल की जरूरतें पूरी करने के लिए काफी नहीं है.


पिता डी प्रकाश राव ने अपनी बेटी भानुप्रिया को खुब शिक्षा दी । भानुप्रिया ने दिल्ली मे रह कर होटल मैनेंजमेंट की शिक्षा कम्पलिट की । उसके बाद भानुप्रिया ने औस्ट्रेलिया और सिंगापुर में नौकरी भी की । उसके बाद  2019 में भानुप्रिया के पिता की तबियत खराब होने के कारण भानुप्रिया वापस कटक लौट आई . भानुप्रिया का कहना है कि यह स्कूल मेरे  पापा डी प्रकाश राव ने गरीब बच्चों के लिए खोला था, आज कई  सारे बच्चे इस स्कूल से पढ़ कर अच्छी जगह शिक्षा ले रहे हैं। यह देखकर मन को बहुत सुकून मिलता है .