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बिहार का नाम सुनकर आपके मन में एक ही ख्याल आता होगा कि वही बीमारू राज्य पिछड़ा राज मगर कुछ ऐसे भी तथ्य हैं जो आपको ऐसे सोचने पर पछतावा हो सकता है

भगवान बुद्ध की कर्म भूमि बिहार है बिहार में ही सबसे पहले गणराज्य की बीज वही गई थी जो बाद में आधुनिक लोकतंत्र के रूप में भला बड़ी हैरानी होती है कि इतिहास में भारतवर्ष का अहम अंग रहे बिहार आज बीमारू राज्य में माना जाता है 

चलिए तो देखते हैं कि आखिर बिहार की ऐसी कौन सी घटनाएं हैं जो उसे गौरवान्वित करता है भगवान बुद्ध की कर्म भूमि बिहार है बिहार में ही सबसे पहले गणराज्य की बीज वही गई थी जो बाद में आधुनिक लोकतंत्र के रूप में भला बड़ी हैरानी होती है कि इतिहास में भारतवर्ष का अहम अंग रहे बिहार आज बीमारू राज्य में माना जाता है अगर भारत के सभी राज्य की तुलना बिहार से करी जाए तो ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गौरव गाथा शायद सबसे समृद्ध है भले ही बिहार का वर्तमान परिदृश्य से भ्रष्ट राजनीतिक से धूमिल हो चुका हो लेकिन इसके इतिहास पर हर बिहारी को गर्व होना चाहिए

प्राचीन इतिहास के पन्नों को पलटने से यह मिलता है कि बिहार एक अहम स्थान रखता है हिंदुओं के सनातन धर्म से जुड़े कई दृष्टांत और कहानियां बिहार से संबंध है जीव जंतुओं के अनुसार श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता का जन्म बिहार के सीतामढ़ी में हुआ था जिसे आज सभी लोग जानते हैं सीता राजा जनक की पुत्री थी जनक के राज में आधुनिक उत्तर मध्य बिहार के मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी समस्तीपुर मधुबनी जैसे वर्तमान जिले शामिल थे अग्नि परीक्षा के बाद जब सीता वनवास पर चली गई तो उन्हें बिहार के उस क्षेत्र में महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में प्रश्रय मिला जो अभी गंडक के किनारे बसे वाल्मीकि नगर के नाम से प्रसिद्ध है माता सीता ने यही अपने दोनों पुत्र लव कुश को जन्म दी थी

बिहार एक ऐसा ऐतिहासिक स्थान है जहां भगवान बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ दुनिया भर में अपनी पैठ बना चुके बौद्ध धर्म की जय बिहार से ही शुरू हुई यही नहीं जब जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर का जन्म राजधानी पटना के दक्षिण में स्थित पावापुरी में हुआ और उन्हें निर्माण भी बिहार की धरती पर ही प्राप्त हुआ सिखों के दसवें और आखरी गुरु गुरु गोविंद सिंह का जन्म ही बिहार में ही हुआ यहां आज एक भव्य गुरुद्वारा पटना में स्थित है इसे आज पटना साहिब के रूप में भी जाना जाता है यहां पर सीखो वहां पर अपना मत्था टेकते हैं
प्राचीन इतिहास में अगर जाया जाए तो बिहार तीन प्रमुख महाजनपदों अंग मगध और वजी संघ के रूप में बटा हुआ था मगर और लिछवी के शासनकाल में ही आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत की गई थी अर्थव्यवस्था के रचयिता कौन थे जिसे हम चाणक्य के नाम से जानते हैं उनका भी उदय बिहार की ही धरती पर हुआ चाणक्य मगध के राजा चंद्रगुप्त मौर्य के सलाहकार के रूप में जाने जाते थे यही नहीं बिहार विश्व प्रसिद्ध सुंदरी अमरपाली की नगरी भी रही है अम्रपाली लिच्वी राज के वैशाली में एक गणिका थी जिसने अपनी सुंदरता से यह साबित कर दिया था कि उस समय उसके जैसा और कोई नहीं अपनी वैशाली यात्रा के दौरान कई महारानी ओ का निमंत्रण प्रस्ताव मिलने के बावजूद भगवान बुद्ध ने अमरपाली के साथ भोज लेने का निर्णय लिया

गुप्त काल के दौरान बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय जो कि दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान बनाई यहां पढ़ने के लिए विदेशों से छात्र आते थे बाद में कुछ मुगल शासकों के द्वारा इसे तोड़ दिया गया आज ही इसके खंडहर बिहार के नालंदा जिला में देखने को मौजूद है

बिहार का राजगीर क्षेत्र मोर काल से राजा बिंबिसार की राजधानी रहा है भगवान बुध और भगवान महावीर यहां पर आया आते जाते रहते थे आज भी यहां कई बौद्धिक और शेष मिले हैं तब यह क्षेत्र अपनी औषधियों के लिए जाना जाता था यह तरह-तरह की औषधियां मौजूद मौजूद थी

लगातार विदेशों के द्वारा बिहार पर आक्रमण काफी लंबे समय तक किया गया मध्ययुगीन इतिहास में बिहार एक राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरा मुगल काल में दिल्ली सत्ता का केंद्र बन गया तब बिहार से एक ही शासन काफी लोकप्रिय हुआ जिसका नाम था शेरशाह सूरी आधुनिक मध्य पश्चिम बिहार का सासाराम शेर शाह सुरी का केंद्र था शेरशाह सूरी को उनके राज्य में हुए सार्वजनिक निर्माण के लिए जाना जाता था उन्होंने बहुत प्रसिद्धि भी हासिल की थी

ब्रिटिश शासन काल में बिहार बंगाल का हिस्सा था जिसके शासन की बागडोर कोलकाता से संभाली जाती थी हालांकि इसी दौरान बंगाल का विभाजन हुआ और बिहार उससे अलग हो गया फिर उसके बाद बिहार अपनी एक अलग पहचान बनाई फिर इससे भी उड़ीसा अलग हो गया उड़ीसा अलग होने के पश्चात 2000 में झारखंड भी बिहार से अलग हो गया

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बिहार के बहुत ऐसे नेता थे जिन्होंने बढ़-चढ़कर भागीदारी ली राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत चंपारण से की थी जो आगे चलकर बहुत आजादी की लड़ाई में भूमिका निभाई आजादी के बाद जयप्रकाश नारायण के छात्र आंदोलन को भला कौन भूल सकता है जयप्रकाश नारायण का जेपी आंदोलन ना सिर्फ बिहार तक ही सीमित था बल्कि पूरे देश में कोहराम मचा रखा था बिहार की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति में इसके काफी बदलाव देखने को मिला कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर क्षेत्रीय पार्टियों का केंद्र पर अधिकार जमा है