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DIGITAL EDUCATION |भारत देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिये नये दिशा का निर्माण

देश को विकसित राष्ट्र बनाने दिशा में युवा आबादी का भरपूर लाभ तभी उठाया जा सकता है जब हम उन्हें ज्यादा से ज्यादा संख्या में उच्च गुणवत्तायुक्त और तकनीकी शिक्षा में दायरे में लाएं...

दुनिया भर  में अनेको  आविष्कार हो रहे हैं। इन आविष्कारों का पहले कभी जिंदगी और आजीविका पर इतना गहरा असर  नहीं पढता था  जितना आज हो रहा है। बीते कई  वर्षों से   मैं यह देख रही हूं कि तकनीक ने भारत के नौजवानों को सही शिक्षा, सीखने  को मिला  है, वह वाकई आश्चर्यजनक है।  भारत  वर्ष  भर की शिक्षा व्यवस्था में आए बदलाव से लेकर डिजिटल शिक्षा को तेजी से अपनाने के  कारन  हमारे युवा  पीढ़ी की शिक्षा के स्तर में काफी  इजाफा  देखने को मिला   है।  डिजिटल एजुकेशन  छात्रों को पूरी क्षमता से पढ़ाई करने के लिए सशक्त बना रही है।  तो युवा आबादी खुद को इस इनोवेशन की क्रांति के केंद्र में देख रही है


 भारत  के जनता, समुदाय व इकोनॉमी  को सशक्त बनाने पर जोर


 किसी  भी  समाज  को समानता, समग्रता और हिस्सेदारी  उस  समाज की बुनियादी  ताकत   होती है और शिक्षा इन तीनों सिद्धांतों का आधार है। विचार और स्वतंत्रता के साथ यह विकास और सोच   को बढ़ावा देता है। इससे लोगों और समुदाय के साथ इकोनॉमी को  भी   मजबूत बनती है।  दुनिया में सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्था वाले प्रमुख देशों में भारत भी है लेकिन यहां भी 15 से 25 साल के आयुवर्ग में मोटे तौर पर 25.5 करोड़ कुल छात्रों में से केवल 43 प्रतिशत छात्रों का ही शिक्षण संस्थानों में दाखिला हो पाया है। ऐसे में मूल सवाल यही है कि वह क्या कारण है, जिसके कारण शिक्षा अभी भी अधिसंख्य लोगों की पहुंच से दूर है?

पढ़ाई की  जरूरतो को  पूरी करने में सहायक

वैसे देखा जाए तो शिक्षकों को सही प्रशिक्षण और उपकरण प्रदान करने से लेकर छात्रों की पढ़ाई संबंधी जरूरतें पूरी करने की दिशा में डिजिटल  तकनीक ने सभी के लिए शिक्षा को ज्यादा आसान   बना दिया   है और लाखों छात्रों के लिए शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने में भी   बहुत  सही साबित  हुआ  है।


 डिजिटल एजुकेशन  से आयी छात्रों के जीवन में बदलाव

पहले के  स्कूलों मेंडायग्राम और मॉडल क्लास को  ही  बेहतरीन एजुकेशन को बयां करते थे। लेकिन अब ये क्लास से पुराना तकनीक माना  जाता  है आज कल  जिस क्लास में बेहतर टेक्नॉलजी है उतनी ही बेहतर एजुकेशन उसे दिया जाने लगा है। शहर के स्कूलों में इन दिनों तकनीक का चलन काफी बढ़ गया है। फिर चाहे पावरपाइंट प्रेजेंटेशन हो या फिर ऑनलाइन लेक्चर व विडियो ही क्यों न हो। आज सभी स्कूल किसी न किसी रूप में तकनीक को अपनी एजुकेशन का हिस्सा बना रहे हैं। कुछ स्कूलों ने तो पूरी एजुकेशन ही डिजिटल कर दी है। क्लास में लैपटॉप और टैबलट पर पढ़ाई कराने वाले स्कूल भी अब शहर में मौजूद हैं। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाला भविष्य तकनीक का ही है।

सीबीएसई के को-ऑर्डिनेटर जावेद आलम खान ने बताया कि आज क्लासरूम की पढ़ाई पूरी तरह से बदल गई। दस साल पहले तक यह सिर्फ चार्ट और ब्लैकबोर्ड तक ही सीमित थी। लेकिन अब सबकुछ ऑनलाइन होता जा रहा है। अब क्लास में बच्चों को पावरपाइंट प्रेजेंटेशन से पढ़ाना बेहतर माना जा रहा है। इसका असर भी छात्रों में देखने को मिलता है। वहीं किसी विषय को समझाने के लिए विडियो और डिजिटल चार्ट, डायग्राम, थ्री-डी डायग्राम से न सिर्फ छात्रों को आसानी से समझ आता है बल्कि उन्हें लंबे समय तक याद भी रहता है। पहले इतिहास सिर्फ किताबी ज्ञान होता था लेकिन आज इतिहास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री, फिल्म आदि दिखाने से छात्रों को वो जुबानी याद हो जाता है।