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हमारे देश में चुनाव के दौरान शांति और अनुशासन का दूर दूर तक कोई नाम नहीं होता और बिना हिंसा के ये सम्पन्न नहीं होते। फिर चाहे वे लोकसभा के चुनाव हों या पंचायत चुनाव।

हाल में पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए जारी वोटिंग के लिए किए गए सुरक्षा इंतजामों की पोल खुलने लगी है। कई जगहों से मतदान के दौरान हिंसा की खबरें आने लगी हैं।

आ रही खबरों के मुताबिक अलग-अलग स्थानों पर हुई झड़पों में 20 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। वहीं, सामने आए एक विडियो में कथित तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता एक पोलिंग बूथ के बाहर लोगों को वोट डालने जाने से रोकते हुए दिख रहे हैं और बांगर में टीएमसी पर बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगे हैं।

आपको बता दें कि बंगाल के कूचबिहार में दो गुटों के बीच झड़प में करीब 20 लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों ने उन पर हमला करने का आरोप तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगाया है।
उन्होंने बताया, ‘हम वहां वोट करने गए थे लेकिन टीएमसी के लोगों ने लाठियों से हम पर हमला कर दिया।’ सभी घायलों को एमजेएन अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

कूचबिहार के ही बूथ नंबर 8/12 में पुलिस के सामने ममता सरकार में मंत्री रबींद्रनाथ घोष ने एक बीजेपी समर्थक को थप्पड़ जड़ दिया। मौजूद भीड़ और पुलिस ने सुजीत कुमार दास नाम के समर्थक को बाहर किया।

इतना ही नहीं, बीरपाड़ा में कुछ लोगों ने बूथ नंबर 14/79 पर जारी वोटिंग में व्यवधान डालने की कोशिश की। बताया गया है कि ये लोग कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ता थे। सामने आए एक विडियो में बड़ी संख्या में लोग वोटरों को बूथ के अंदर दाखिल होने से रोकते दिख रहे हैं।

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उधर, उत्तरी 24 परगना में चुनाव से पहले शनिवार को कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के एक कार्यकर्ता और उसकी पत्नी को जलाकर मार डालने की घटना भी सामने आई है। बताया गया है कि उनके घर को आग लगा दी गई थी जिसमें दोनों की मौत हो गई। पार्टी ने घटना के लिए टीएमसी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है।

गौरतलब है कि चुनाव के लिए नामांकन के समय से ही राज्य का अलग-अलग हिस्सों में हिंसा की घटनाएं सामने आ रही थीं। इसके मद्देनजर चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है और असम, ओडिशा, सिक्किम और आंध्र प्रदेश से लगभग 1,500 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

अगर चुनाव के दौरान यही हाल रहा तो कुछ लोग वोट डालने आते हैं वे भी बचने लगेंगे और तब लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाएगा।

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