(ग्रामीणों से घिरे अधिकारी)
Print Friendly, PDF & Email

रांची : झारखंड के गिरिडीह जिले के मंगरगढ़ी गांव में कथित भूख से हुई सावित्री देवी की मौत मामले में स्थानीय प्रशासन ने आनन-फानन में जांच के बाद बीमारी से हुई मौत करार दिया था, लेकिन अधिकारियों को अपनी ही रिपोर्ट पर पूरा भरोसा नहीं हुआ। बुधवार को जिला प्रशासन की एक टीम परिजनों और आसपास के लोगों का बयान लेने मंगरगढ़ी गांव पहुंची।

गिरिडीह जिला प्रशासन द्वारा सावित्री देवी की मौत को बीमारी से होने की रिपोर्ट देने से नाराज ग्रामीणों ने एडीएम(अपर समाहर्ता) अशोक कुमार के नेतृत्व में मंगरगढ़ी पहुंची अधिकारियों की टीम को बंधक बना लिया। बाद में स्थानीय लोग के हस्तक्षेप से ही सभी अधिकारी मुक्त हुए। मृतका के परिजनों व आसपास के लोगों का बयान दर्ज किये बिना उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनायी और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया।

इससे पहले जिले के उपायुक्त के निर्देश पर अपर समाहर्ता ने सावित्री देवी की मृत्यु की जांच रिपोर्ट मंगलवार को दी थी। इसमें दावा किया गया है कि सावित्री देवी की मौत भूख से नहीं हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ दिनों पहले रिम्स में सावित्री देवी का इलाज किया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें पारेशिमियल हेमाटोमा नामक बीमारी बताई थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सावित्री देवी और उनके देवर भोलाराम महतो का आंगन एक ही है। वह न सिर्फ सावित्री देवी की देखभाल कर रहे थे, बल्कि उन्हें खाना भी खिला रहे थे।

जबकि सावित्री देवी के खाते में अप्रैल महीने में ही पेंशन की राशि 1800 रु ट्रांसफर की गयी थी। अब भी उनके खाते में 2,375 रुपये जमा हैं। जिला प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि सावित्री देवी की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए गांव के लोग लगातार सावित्री देवी से सम्पर्क में थे। साथ ही गांव की कई औरतें सेवा कर रहीं थीं और खाना भी खिला रही थीं।

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓