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राजनीति में बाहुबल और अपराध इस कदर बढ़ गया है कि एक नेता खुद को कानून से ऊपर समझने लगा है। यह बात उन्नाव जिले की बांगरमऊ सीट से बीजेपी विधायक पर लागू होती है। रेप मामले में आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है।

अगर यह शिकंजा पहले कसा गया होता तो शायद आज पीडिता का पिता जिन्दा होता और लडकी को भी इन्साफ मिल चुका होता लेकिन फिलहाल इस मामले में जिस तरह से कानूनी स्तर पर ढिलाई बरती गयी है उस से इतना तो पता चल जाता है कि दबंगों और नेताओं के हाथ में ही शक्ति है।

गौरतलब है कि जब मामला बढ़ने लगा तब जाकर सरकार हरकत में आई और अब खबर है कि यूपी सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दिया है। गिरफ्तारी का फैसला सीबाआई करेगी। बहरहाल विधायक कुलदीप सेंगर पर उन्नाव गैंगरेप मामले में ऍफ़आईआर दर्ज हो गयी है।

हालाँकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद एडीजी राजीव कृष्णा के साथ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) पीड़िता को लेकर उनके गांव माखी पहुंची। मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके बाद एसआईटी टीम ने मामले से जुड़े हर एक पहलू की जांच की। यही नहीं, एसआईटी की पहली रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जिसे सौंपने के लिए राजीव कृष्णा यूपी के डीजीपी ओपी सिंह के पास पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले बीजेपी विधायक सेंगर गिरफ्तारी दे सकते हैं।

इस मामले का दूसरा पहलू यह है कि एसआईटी रिपोर्ट में पीड़िता के पिता से मारपीट के मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर को दोषी बताया है। इसके अलावा दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से रंजिश के चलते आरोप-प्रत्यारोप की बात भी कही गई है। रिपोर्ट में दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से रंजिश के चलते एक दूसरे पर आरोप मढ़ने का जिक्र किया गया है।

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जब मामला बढ़ने लगा तो एसआईटी की पहली रिपोर्ट में पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में पुलिस द्वारा लापरवाही की बात स्वीकार की गई है। इस बीच सूत्रों के मुताबिक, अब कुलदीप सिंह सेंगर पर आपराधिक मुकदमा जल्द दर्ज हो सकता है और एक या दो दिनों में आरोपी विधायक से पूछताछ भी कर सकती है।

रेप मामले में पीड़िता के चाचा ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि इस केस की सीबीआई जांच की जाए। यदि मामले में एसआईटी आरोपी को शाम तक गिरफ्तार कर लेती है तो हमारा विश्वास प्रशासन के प्रति बरकरार रहेगा। हम तब तक दिल्ली नहीं जाएंगे जब तक इस मामले का कोई परिणाम नहीं सामने आ जाता है।’

गौरतलब है कि एडीजी लॉ ऐंड ऑर्डर आनंद कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था, ‘पीड़िता ने अपनी शिकायत में विधायक के अलावा भी कई लोगों का नाम लिया है। इस मामले में SIT का गठन कर दिया गया है।’ उन्होंने कहा, ’11 जून 2017 को दर्ज FIR में विधायक का नाम नहीं था, लेकिन 22 अगस्त 2017 को विधायक का नाम सामने आया था। इस मामले की भी जांच की जाएगी कि FIR के मामले में उन्नाव पुलिस की रिपोर्ट सही थी या नहीं।’

सारे मामले को देखकर यही कहा जा सकता है  बीजेपी विधायक पर शिकंजा पहले कसा होता तो कई जानें बच जातीं। इस देश में इन्साफ बड़ी मुश्किल से मिलता है और कई बार तो मिलता ही नहीं है। अब इस मामले में देखा होगा कि कब इन्साफ मिलता है।

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