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रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ट्वीट कर बताया कि राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में पहल शुरू हो चुकी है, अब ग्रामीणों को वनोत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देने का काम शुरू किया गया है। इस काम में दुनिया की सबसे बड़ी फर्नीचर कंपनी आइकिया भी जुड़ गयी है। आइकिया अपनी सहयोगी कंपनियों के माध्यम से ग्रामीणों द्वारा तैयार किए गए वनोत्पाद खरीदेगी और फिर देश-दुनिया में ब्रांडिंग कर इसे बेचेगी।

स्वीडिश कंपनी झारखंड के वनोपज खरीदेगी। इससे राज्य के 30 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा। राज्य में बांस और फाइबर की उपज प्रचुर मात्रा में होती है। कंपनी की ओर से दुमका के शिकारीपाड़ा के एक कलस्टर में बांस और फाइबर की खरीद भी हो चुकी है। इससे करीब 600 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। राज्य में अन्य 99 कलस्टरों को चिह्नित किया गया है। इससे करीब 30 हजार ग्रामीणों को रोजगार मिल सकेगा।

स्वीडिश फर्नीचर निमार्ता कंपनी आइकिया के एक प्रतिनिधिमंडल ने कंपनी के न्यू बिजनेस मैनेजर संदीप सानन के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। कंपनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि झारखंड में उत्पादित बांस और फाइबर काफी उन्नत श्रेणी के हैं। यहां के उत्पादित वनोपज विदेशों में निर्यात किये जायेंगे। यहां के ग्रामीण वनोपज से उत्पाद तैयार करने में प्रशिक्षित हैं और उनकी हुनर को विदेशों तक पहुंचाया जाएगा। कंपनी की ओर से ईएसएएफ नामक कंपनी से झारखंड में उत्पादित वनोत्पाद की खरीद की जाएगी।
झारक्राफ्ट के एमडी मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि हैंडीक्राफ्ट से जुड़े ग्रामीणों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही स्वरोजगार के माध्यम से उन्हें स्वावलंबी बनाने की कोशिश की जा रही है।

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