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नई दिल्ली (नेशनल डेस्क)।
ज ही के दिन यानी 1 अगस्त 1933 अपने दमदार और संजीदा अभिनय से सिने प्रेमियों के दिलों पर छा जाने वाली ‘ट्रेजडी क्वीन’ मीना कुमारी का जन्म मुंबई में हुआ था। भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ अदाकारा के 85वें जन्मदिन के मौके पर गूगल ने आज शानदार डूडल बनाकर उन्हें सम्मनित किया है।

मीना कुमारी ने तीन दशकों तक बॉलीवुड पर राज किया है। मीना कुमारी ने परिणीता, आजाद, फूल और पत्थर, बहारों की मंजिल, एक ही रास्ता, साहब, बीबी और गुलाम, दिल एक मंदिर और पाकीजा जैसी मशहूर फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया है।

बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका असली नाम महजबीं बानो था। जिसे बाद में निर्माता-निर्देशक विजय भट्ट ने इन्हें मीना कुमारी नाम दिया। मीना कुमारी ने बतौर चाइल्ड एक्टर ही काम करना शुरू कर दिया था। महजबीं पहली बार 1939 में फिल्म निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म “लैदरफेस” में बेबी महज़बीं के रूप में नजर आईं। इसके बाद 1940 की फिल्म “एक ही भूल” में विजय भट्ट ने इनका नाम बेबी महजबीं से बदल कर बेबी मीना कर दिया।

मीना कुमारी अपने माता-पिता इकबाल बेगम और अली बक्श की तीसरी बेटी थीं। इनकी दो बड़ी बहने और भी थी। बताया जाता है कि जब मीना कुमारी का जब जन्म हुआ था उस समय उनके पिता के पास अस्पताल की फीस भरने तक के लिए भी पैसे नहीं थे। इसलिए इनके माता पिता ने इन्हें मुस्लिम अनाथालय के बाहर छोड़ने का फैसला लिया। तब उन्होंने ऐसा ही किया हालांकि बाद में मासूम बच्ची के प्रति प्यार ने उन्हें खिंच ही लिया और वह उन्हें वापस ले आए।

(अपने दमदार और संजीदा अभिनय से सिने प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली ‘ट्रेजडी क्वीन’ मीना कुमारी)

मीना कुमारी के पिता एक पारसी थिएटर में हार्मोनियम बजाने और म्यूजिक सिखाने का काम करते थे। इसके अलावा वह उर्दू शायरी भी लिखा करते थे। मीना कुमारी की मां उनके पिता की दूसरी बीवी थीं। वह पेशे से स्टेज डांसर थीं। 1952 में तमाशा से शुरू हुआ मीना कुमारी और अशोक कुमार का ऑन स्क्रीन संगम पाकीज़ा (1972) तक जारी रहा। लगभग तीन दशक तक अपने अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज करने वाली अभिनेत्री मीना कुमारी 31 मार्च 1972 को महज 38 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

 मीना कुमारी इंडस्ट्री की उन चुनिंदा अदाकाराओं में से एक हैं, जिन्होंने बेहद कम वक्त में एक ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया था। जो हर किसी के लिए इतना आसान नहीं होता। हिंद वॉच मीडिया अदाकारी की उस बेजोड़ मल्लिका को उनके जन्मदिन पर याद करते हुए उन्हें सलाम पेश करता है।

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