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नई दिल्ली
ससी/एसटी एक्ट के विरोध में सवर्णों द्वारा गुरुवार को बुलाये गए भारत बंद का असर मिलाजुला देखने को मिला। अगर बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को छोड़ दें तो भारत बंद बिलकुल बेअसर रहा। हालांकि, कई जगहों पर सवर्ण समाज के कुछ कार्यकर्ता रैली निकालकर बंद कराने निकले। लेकिन, उन्होंने दबावपूर्वक बंद नहीं कराया। पुराना बसस्टैंड में उन्होंने सांकेतिक रूप से दुकानों को बंद करने का आग्रह किया।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को एससी-एसटी अत्याचार निवारण एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी और अग्रिम जमानत से जुड़े कुछ बदलाव किए थे। अदालत का कहना था कि इस एक्ट का इस्तेमाल बेगुनाहों को डराने के लिए नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया था। इस बंद का कई राजनीतिक पार्टियों ने समर्थन भी किया था। इस दौरान 10 से ज्यादा राज्यों में हिंसात्मक प्रदर्शन हुआ और 14 लोगों की मौत हुई थी। प्रदर्शनों का सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश और राजस्थान में हुआ था। पीएम मोदी ने 13 अप्रैल को कहा था, “मैं देश को विश्वास दिलाता हूं कि जो कड़ा कानून बनाया गया है, उसे प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।”

केंद्र सरकार पर विपक्ष और एनडीए के सहयोगी दल अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले बदलने की मांग कर रहे थे। इसके बाद केंद्र ने संसद के मानसून सत्र में एक बिल पास कर संशोधित कानून बनाया। सरकार का दावा है कि कानून अब पहले से भी सख्त है।

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