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श्चिम बंगाल के मिदनापुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान टेंट गिरने की घटना में केंद्र ने रिपोर्ट सौंप दी है। जिसमें इस घटना के लिए ममता बनर्जी की सरकार के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। कैबिनेट सचिवालय में सुरक्षा सचिव एस के सिन्हा की अगुवाई वाली समिति ने गृहसचिव राजीव गौबा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

टेंट की नहीं हुई जांच
जांच कमेटी की इस रिपोर्ट में कहा गया कि जिस स्थल पर रैली आयोजित करवाई गई थी उसके पांच किमी तक पुलिस तैनात नहीं थी साथ ही एसपीजी को भी पूरी तरह से सहायता नहीं प्रदान करवाई गई। इसके साथ ही टेंट की भी सही से जांच नहीं हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार टेंट के खंबों में चार स्क्रू की जगह एक स्क्रू लगे थे। इस पंडाल को तैयार करने में जिन लोहे के पाइपों का इस्तेमाल किया गया था उनमे जंग लगा हुआ था।

कार्यक्रम में नियमों का नहीं हुआ पालन   
रिपोर्ट में कहा गया कि भीड़ को नियंत्रित करने में भी राज्य पुलिस का रवैया सहयोग वाला नहीं रहा। क्षमता से ज्यादा लोगों को कार्यक्रम स्थल पर जाने दिया गया। उन्हे रोकने के लिए कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। केंद्र के सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री सहित एसपीजी सुरक्षा प्राप्त लोगों के लिए ब्लू बुक के नियमों का पालन नहीं किया गया।

अधिकारियों ने आरोपों को किया खारिज 
वहीं स्थानीय अधिकारियों ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया। अधिकारियों ने कहा था कि पीएम मोदी की रैली के लिए 1,000 कर्मियों को नियुक्त किया था। एडवांस सिक्योरिटी दी गई थी। गौरतलब है कि 17 जुलाई को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान पंडाल गिरने की वजह से भगड़दड़ मच गई थी, जिस घटना में तकरीबन 90 लोग घायल हुए थे। बताया जा रहा था कि इस घटना की वजह से कई लोगों की जान ले लेती।

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