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बिहार में सियासी मोर्चे पर भले ही लालू प्रसाद यादव को साजिशन दरकिनार कर दिया गया हो लेकिन उनके बेटे तेजस्वी के तेवर अभी भी सच बोलने से पीछे नहीं हटते दिख रहे। वे खुलकर सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अपनी बात रख रहे हैं।

लालू प्रसाद यादव की गिरफ्तारी के दौरान भी उनके बेबाक बयान सुर्खियों में रहे लेकिन अब उन्होंने नीतीश कुमार को जातिवादी मंत्री करार दिया है।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सीएम पर हमला मामले में पुलिस वोटर लिस्ट में जाति देख-देख कर निर्दोषों को जबरन नामजद अभियुक्त बना रही है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमले की घटना में प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर से सामने आई है। आरोप लग रहे हैं कि इस मामले में पुलिस ने मर चुके एक व्यक्ति को भी नामजद अभियुक्त बनाया है।

इसके बाद लालू यादव के बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार को जातिवादी बताते हुए तीखा हमला बोला है।

उन्होंने आश्चर्य जताया कि विजय राम नामक व्यक्ति का वर्ष 2015 में ही निधन हो चुका है, इसके बावजूद उन्हें नामजद अभियुक्त बना दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम नीतीश के कहने पर ही अनुसूचित जाति के चार लोग वीरेंद्र पासवान, विनय राम, इंद्रजीत राम और लूटन राम का नाम एफआईआर में दर्ज किया गया है। राजद नेता ने दावा किया कि ये चारों विदेश में नौकरी करते हैं।

हालांकि जवाब में पार्टी ने कहा कि बिहार के सबसे बड़े जातिवादी नेता राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव हैं। जातिवाद और लालू का चोली-दामन का रिश्ता रहा है। उनकी पूरी राजनीति ही जातिवाद पर आधारित रही है।

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लेकिन बीते कुछ समय से यह साफ हो गया है कि सत्ता मेजन बैठे लोग अपने शासकीय बल का प्रयोग निजी हित के लिए कर रहे हैं। जो वही राजा के खिलाफ बोलेगा, सूली चढ़ेगा की तर्ज पर आज का सिस्टम चलता दिख रहा है। ऐसे में तेजस्वी की बातों को सिरे से खारिज करने के बजाए मामले को उचित तरीके से हल देने पर जोर देना चाहिए पार्टी को।

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