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राजनीति में कौन कब दोस्त बन जाए और कब दुश्मन कहा नहीं जा सकता। अब तेलगु देशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू को ही देख लीजिए।

कल तक केंद्र सरकार के साथ कदमताल मिलाकर चलने वाली टीडीपी अब सरकार से अलग होकर मोदी सरकार को झटका देने की तैयारी में है।

क्या है पूरा माजरा, आइये जानते हैं। दरअसल आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने के मुद्दे पर नाराज तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने सरकार से अलग होने का फैसला किया है।

टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका ऐलान किया। केंद्र सरकार में टीडीपी के मंत्री गुरुवार सुबह मंत्री पद से अपना इस्तीफा दे देंगे। हालांकि पार्टी ने साफ किया है कि वह NDA से अलग नहीं होगी।

चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ‘यह हमारा अधिकार है। केंद्र सरकार हमसे किया गया वादा पूरा नहीं कर रही है। हम इस मुद्दे को बजट के दिन से उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से इस संबंध में कोई जवाब नहीं आया।’
नायडू ने कहा कि वह पिछले 4 साल से धैर्य दिखा रहे हैं और उन्होंने हर तरह से केंद्र सरकार को मनाने की कोशिश की है।

उन्होंने कहा, ‘एक जिम्मेदार नेता होने के नाते मैंने प्रधानमंत्री को अपने फैसले के बारे में बताने की कोशिश की, लेकिन वह इसके लिए उपलब्ध नहीं हो सके। केंद्र सकार हमारी बात सुनने के मूड में नहीं है। मुझे नहीं पता कि मुझसे क्या गलती हुई है। वह ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं?’

केंद्र में टीडीपी कोटे से मंत्री अशोक गजपति राजू और वाई. एस. चौधरी गुरुवार सुबह मंत्री पद से इस्तीफा देंगे। टीडीपी के सरकार से अलग होने को बीजेपी के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

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अब लगातार चुनावी निकायों में लगातार मिलती हार और टूटते गठबंधन भाजपा की नैया डूब सकते हैं।

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