तस्वीर हिंद वॉच
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ग्रास रूट रिपोर्टर किशन कुमार दत्ता की रिपोर्ट
बुंडू, झारखंड
माड़ एवं सिल्ली में इन बंदरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा। बंदरों के उत्पात से क्षेत्रवासियों में भय बढ़ता ही जा रहा है। पांच की संख्या मे बंदरों का दल ग्रामीणों के घरों व लगाए गए अमरूद, पपीता,सब्जियों, फल आदि को बर्बाद कर रहे है। लोगों द्वारा लंगूरो के साथ खिलवाड़ करना एक मस्ती देखा जा रहा है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इसमे खतरा भी है इसलिए वन विभाग को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।

किसान व ग्रामीण बंदरों के आतंक से पूरी तरह से परेशान हैं। जहां महिलाएं व बच्चे बंदरों के आतंक से छतों पर जाना बंद कर दिये हैं वहीं खेतों में उगी सब्जियों को बंदर खाकर नष्ट कर दे रहे हैं। जिससे किसानों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बंदर खेतों में पहुंचकर उसमें लगी गोभी, बैगन आदि को खाने के अलावा तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दे रहे हैं। बंदरों के आतंक से दुखी होकर किसानों ने गेहूं की खेती बंद कर दी है। पिछले पांच साल से किसान केवल धान की खेती कर रहे हैं। कभी सिल्ली गांव के किसान गेहूं बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे। अब खाने के लिए गेहूं नसीब नहीं है। उन्होंने वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की गुहार लगाई है।

सिल्ली गांव की दूरी तहसील मुख्यालय से चार किमी है। गांव के 60 से अधिक परिवार खेती कर आजीविका चलाते हैं। खेती के लिए चार हेक्टेयर जमीन भी ग्रामीणों के पास है, लेकिन पिछले कुछ सालों में बंदरों के आतंक से वही खेती अब समाप्त होने की कगार खड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस गति से वनों को नष्ट किया जा रहा है आने वाले समय जानवर अपना आश्रय गांवो को बना के लिए मजबूर हो जाएंगे ।
पोस्टल कोड 835204 835210

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