Monday, November 19, 2018
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हमारी अर्थी शाही हो नहीं सकती (कविता)- अनुज लुगुन

हमारे सपनों में रहा है एक जोड़ी बैल से हल जोतते हुए खेतों के सम्मान को बनाए रखना हमारे सपनों में रहा है कोइल नदी के किनारे एक...

रीढ़ की हड्डी (नाटक)- जगदीशचंद्र माथुर

उमा : लड़की रामस्‍वरूप : लड़की का पिता प्रेमा : लड़की की माँ शंकर : लड़का गोपालप्रसाद : लड़के का बाप रतन : नौकर बाबू : अबे, धीरे-धीरे चल!... अब...

हैरान थी हिन्दी (कविता)- दिविक रमेश

हैरान थी हिन्दी उतनी ही सकुचाई लजाई सहमी सहमी सी खड़ी थी साहब के कमरे के बाहर इज़ाजत मांगती मांगती दुआ पी.ए. साहब की तनिक निगाह की। हैरान थी हिन्दी आज भी आना पड़ा था...

मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है (कविता)- अंशु मालवीय

मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है। जीवन की उत्ताल तरंगों के बीच गिर-गिर पड़ते हैं स्मृति की नौका से बिछल-बिछलकर; फिर भरसक-भरजाँगर कोशिश कर बमुश्किल तमाम चढ़ पाते हैं...

सत्य कोयले की खदान में लगी आग है (कविता)- बाबुषा कोहली

मैं कहती हूँ किसी इश्तहार का क्या अर्थ बाकी है कि जब हर कोई चेसबोर्ड पर ही रेंग रहा है आड़ी-टेढ़ी या ढाई घर चालें तो...

वृद्धाएँ धरती की नमक हैं (कविता)- अनामिका)

'कपड़ा है देह', '...जीर्णाणि वस्त्राणि' ...वाला यह श्लोक 'गीता' का, सुना था कभी बहुत बचपन में पापा के पेट पर पट्ट लेटे-लेटे ! संदर्भ यह है कि दादाजी गुजर...

वसूली करना अपुन से सीखो (व्यंग्य)- अर्चना चतुर्वेदी

हमारे देशवासियों की आदतें और सोच सारी दुनिया से निराली है। जैसे पूरे पर्वत पर संजीवनी बूटी चमकती थी ऐसे हम पूरी दुनिया में...

अमेरिका मुझे क्यों पसंद नहीं है (व्यंग्य)- हरि जोशी

मुझे अमेरिका क्यों पसंद नहीं। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि वहां थूकने की स्वाधीनता बिलकुल नहीं है। मुझे आश्चर्य है, वह कैसा...

आर्ट का पुल (कहानी) -फ़हीम आज़मी

पहले तो सारा इलाका एक ही था और उसका नाम भी एक ही था। इलाका बहुत उपजाऊ था। बहुत से बाग, खेत, जंगली पौधे,...

मर्द और औरत (नाटक)- रशीद जहाँ

औरत - अरे फिर आ गये! मर्द - जी हाँ औरत - अभी कल ही तो आप शादी करने गये थे! मर्द - गया तो था! औरत -...