Sunday, December 16, 2018
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पंच महाराज (व्यंग्य )- बालकृष्ण भट्ट

माथे पर तिलक, पाँव में बूट चपकन और पायजामा के एवज में कोट और पैंट पहने हुए पंच जी को आते देख मैं बड़े...

सावधान! मैं किताब लिख रहा हूँ (व्यंग्य)- संजय जोशी “सजग”

ऋषभ जी एक चिंतक और लेखक हैं। इस क्षेत्र में थोड़ा बहुत उनका नाम भी है और पेशे से अध्यापक जो हैं, अपने कार्यस्थल...

आलस्य-भक्त (व्यंग्य)- गुलाब राय

अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम।      दास मलूका कह गए, सबके दाता राम ।। प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर...

पाकिस्तान समुंदर-ए-कुफ्र में एक रोशन जजीरा है (व्यंग्य)- पतरस बुखारी

यहां के लोग कुदरत की तमाम नेमतों से अरास्ता हैं। खूबसूरत झीलें, खुले मैदान, धूल, मिट्टी, शोर-ओ-गुल, सब इफरात से पाए जाते हैं। कोयला...

वसूली करना अपुन से सीखो (व्यंग्य)- अर्चना चतुर्वेदी

हमारे देशवासियों की आदतें और सोच सारी दुनिया से निराली है। जैसे पूरे पर्वत पर संजीवनी बूटी चमकती थी ऐसे हम पूरी दुनिया में...

लीडर-लाला (व्यंग्य)- हरिशंकर शर्मा

 एक खास किस्म का समझदार जंतु होता है, जो हर मुल्क और मिल्लत में पाया जाता है। उसे कौम के सर पर सवार होना...

बैंड बनाम बैंडेज (व्यंग्य)- पंकज प्रसून

पक्का ने पैंतालीस साल की उम्र में मजबूरीवश डॉक्टरी सीखी। उनकी प्रजनन क्षमता के चलते ऐसा हुआ। दस बच्चे और दो बीवियों सहित बारह...

कीचड़ महिमा न्यारी (व्यंग्य) – गोविंद सेन

मैं अक्सर कीचड़ चिंतन में डूबा रहता हूँ। इससे मुझे बहुत राहत मिलती है। यह मेरी थैरेपी है। जब मैं कीचड़ चिंतन में डूबता...

अंधा बांटे रेवड़ी (व्यंग्य)- अरविंद कुमार खेड़े

'अंधा बाँटे रेवड़ी, अपने अपने को...' यह मुहावरा है लोकोक्ति? यह गुणी ज्ञानी-जनों का विषय है। मेरी समस्या दूसरी है। क्यों कि मैं गुणी-ज्ञानी...

लूट इंडिया लूट (व्यंग्य)- शशिकांत सिंह ‘शशि’

दोस्तों! 'लूट इंडिया लूट', रियलिटी शो के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। आज तक हम टीवी पर केवल मनोरंजन...