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अक्सर महिलाओं में अपनी बीमारियों को छिपाने की आदत देखी गयी है, अब इसे शर्म कहें या हमारा सामजिक ढांचा, लेकिन यह आदत उनके स्वास्थय पर ही भारी पड़ती है और कई बार यह लापरवाही जानलेवा साबित होती है।

आमतौर पर महिलाओं को कई तरह के संक्रमण से गुजरना पड़ता है जिनको लेकर वे खुलकर बात करने से कतराती है लेकिन अब यह बंद होना चाहिए। महिलाओं में होने वाली बीमारियों में इन दिनों यूरिन इन्फेक्शन की समस्या बेहद आम है। इस समस्या का प्रमुख कारण स्वच्छता न बरतना होता है। आमतौर पर यह यूरिनरी कॉर्ड में होने वाला एक संक्रमण है, जिसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन कहा जाता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रेखा सचान बताती हैं कि एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत महिलाएं जीवन में कभी न कभी यूटीआई से ग्रसित होती हैं।

यह जीवाणु जन्य संक्रमण है, जिसमें कॉर्ड का कोई भी भाग प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यूरिन में जीवाणु नहीं होते हैं और यह संक्रमण यूरिन में जीवाणु की मौजूदगी के कारण होता है। जब मूत्राशय या गुर्दे में जीवाणु प्रवेश कर जाते हैं और बढ़ने लगते हैं तो यह स्थिति आती है। विशेषज्ञ बताती हैं कि यूरिन इन्फेक्शन होने पर घबराने की जरूरत नहीं है।

अगर शुरुआत में इसका सटीक इलाज करवा लिया जाए तो दिक्कत को जड़ से खत्म किया जा सकता है। इसमें दवाओं की हल्की डोज दी जाती हैं। साथ ही सफाई रखने के तरीके बताएं जाते हैं। गर्भावस्था में यूरिन इन्फेक्शन होने पर गर्भस्थ शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है और वह संक्रमण की चपेट में आ सकता है।

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गर्भावस्था के दौरान सफाई का विशेष ध्यान रखें। यूटीआई होने पर मरीज को पेशाब में रुकावट, गुप्त अंग में लाल चकत्ते पड़ना, जलन और पेशाब में ब्लड पास होने की दिक्कत हो सकती है। इसका ठीक से इलाज न होने पर संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है।

इससे शरीर में खून की कमी हो सकती है। किडनी में एरिथ्रोपीटिन नामक हार्मोन होता है। इससे बोन मेरो के जरिए रेड ब्लड सेल बनती है। किडनी में इन्फेक्शन होने से हार्मोन का असर कम होने लगता है, जिससे शरीर में हिमोग्लोबिन घट जाता है।

जरा सी सावधानी से अगर कोई बीमारी और संक्रमण दूर हो सकता है तो फिर उसमें शर्माना कैसा?

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