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ऋषिकेश, उत्तराखंड
गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने को लेकर विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का एम्स ऋषिकेश में निधन हो गया। स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद(प्रोफेसर गुरुदास अग्रवाल) 111 दिनों से अनशन पर थे। स्वामी सानंद अपना अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को शरीर दान कर गए। डॉक्टरों के मुताबिक कमजोरी और हार्ट अटैक से स्वामी सानंद का निधन हुआ है। बुधवार को स्वामी सांनद को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था।

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशनरत थे। स्वामी सानंद के निधन के आहत और गुस्साए मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया है कि सांनद की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि बुधवार को सानंद को एम्स ले जाते वक्त मैंने कहा था कि वहां उनको मार दिया जाएगा और वैसा ही हुआ।

वहीं ब्रहृचारिणी विभा दीदी ने कहा है कि स्वामी सानंद ने गंगा के लिए जान दी है। जबरन स्वामी सानंद को उठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया था। बता दें कि सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से वार्ता विफल होने के बाद मंगलवार को उन्होंने जल भी त्याग दिया था। बुधवार को पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12:30 बजे पुलिस बल मातृसदन पहुंचा था।

इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट और कनखल सीओ मातृसदन पहुंचे और आश्रम में धारा 144 लगाए जाने की बात कही। इस पर स्वामी शिवानंद भड़क गए और आश्रम में धारा 144 लगाना नियमों के विरुद्ध बताया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने स्वामी शिवानंद से सानंद को ले जाने की अनुमति मांगी। सिटी मजिस्ट्रेट के आग्रह को स्वामी शिवानंद मान गए। मगर स्वामी सानंद ने जाने से इनकार कर दिया था। इसपर सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस बल ने जबरन स्वामी सानंद को उठाकर एंबुलेंस में बैठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया था।

कई बार एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वामी ने अनशन नहीं तोड़ा। स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने गंगा रक्षा के लिए अपनी तरफ से तैयार ड्राफ्ट के आधार पर एक्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार को नौ अक्तूबर तक का समय दिया था। मांग पूरी न होने पर वह दस अक्तूबर से जल त्यागकर अनशन पर बैठ गए थे।

आईआईटी के प्रोफेसर रहे प्रो जीडी अग्रवाल का गंगा को बचाने के लिये ये पांचवां उपवास था। प्रो अग्रवाल केंद्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के पहले सदस्य सचिव रह चुके थे और गंगा के लिये लम्बे समय से संघर्ष कर रहे थे।

स्वामी सानंद ने 13 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन पत्र का कोई जवाब न आने पर वह 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे। कुछ दिनों बाद प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर एम्स में भर्ती कराया था। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें वापस मातृसदन छोड़ा गया था।

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