Print Friendly, PDF & Email



अब तक शिक्षा और सूचना का अधिकार के बारे में तो आपने सुना होगा लेकिन अब देश को मृत्यु का अधिकार भी देश को मिल गया है।

यह ऐतिहासिक फैसला हुआ है आज और सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में मरणासन्न व्यक्ति द्वारा इच्छा मृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत (लिविंग विल) को गाइडलाइन्स के साथ कानूनी मान्यता दे दी है।

यह ऐतिहासिक कब और कैसे आया, आइये जानते हैं। गौरतलब है कि कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि मरणासन्न व्यक्ति को यह अधिकार होगा कि कब वह आखिरी सांस ले। कोर्ट ने कहा कि लोगों को सम्मान से मरने का पूरा हक है।

वैसे आपको बता दें कि गौरतलब है कि एक एनजीओ कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जिस तरह नागरिकों को जीने का अधिकार दिया गया है, उसी तरह उन्हें मरने का भी अधिकार है।

देखना होगा कि अब इस फैसले को किस तरह कांगू किया जाता है और कहीं इसका दुरुपयोग तो नहीं होगा।

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓

यह भी पढ़ें :  विपक्ष की मांग पर चुनाव आयोग ने भेजा मोदी सरकार को पत्र