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कट्टरपंथी और अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ खड़े लोगों के मुंह पर तमाचा मारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फ़िल्म पद्मावत की रिलीज को न सिर्फ हरी झंडी दी है बल्कि उन राज्यों से भी बैन हटाने की बात कही है जो राज्य सेंसर से फ़िल्म पास होने के बावजूद अपने अपने राज्यों में इस पर बैन कायम रखे थे।

बात दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों में फिल्म ‘पद्मावत’ को रिलीज करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सरकार वाले राज्यों में ‘पद्मावत’ पर लगे बैन पर स्टे भी लगा दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिल्म दिखाए जाने के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। हालांकि राज्य सरकारें अब भी बैन कायम रखने का कानूनी जुगाड़ तलाश रही हैं और करणी सेना धमकी दे रही है।

राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश की सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने कहा है कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में फिर से अपील करने के रास्ते तलाशे जाएंगे।

इधर राजपूत करणी सेना के चीफ लोकेंद्र सिंह कल्वी ने कहा कि वह पूरे देश के सामाजिक संगठनों से अपील कर रहे हैं कि पद्मावत नहीं चलनी चाहिए। कहते हैं कि जनता फिल्म हॉल पर कर्फ्यू लगा दे। बीजेपी के बागी नेता और ‘पद्मावत’ के नाम पर सुर्खियां बटोरने वाले सूरज पाल अम्मू ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने लाखों-करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाया है।

जरा सोचिए देश में अराजकता का माहौल है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकारें और कट्टर संगठन अपनी नाजायज मांग पर अड़े हैं।

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बहरहाल कोर्ट का यह फैसला दरअसल करणी सेना जैसे असामाजिक तत्वों और इतिहास के नाम पर अपनी दुकान चमकाने वालों पर शिकंजा कसेगा।

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