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नई दिल्ली, 2 जुलाई 2018    
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही उत्तर प्रदेश में मुठभेड़ों का सिलसिला शुरू हो गया। खुद योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा में यह कहा था कि अपराधी या तो अब उत्तर प्रदेश छोड़ दें या सुधर जाएँ, वरना एनकाउंटर के लिए तैयार रहें। उत्तर प्रदेश से लगातार एनकाउंटर की ख़बरें आने लगीं। सरकार अपनी पीठ यह कहते हुए थपथपाने लगी कि अब अपराधी थाने में ज्यादा महफूज महसूस करने लगे हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ पर यह आरोप भी लगा कि एक के बाद एक हो रहे अपराधियों के एनकाउंटर में अधिकतर फर्जी हैं और सरकार सिर्फ अपनी वाहवाही के लिए बेकसूरों को एनकाउंटर के नाम पर मौत के घाट उतार रही है।

यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया हैं जहाँ देश की सबसे बड़ी आदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में फर्जी मुठभेड़ होने का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार से 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायाधीश ए एम खानविलकर और डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने गैर सरकारी संस्था पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर एनकाउंटर से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है।

मार्च 2017 से सूबे में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद मुठभेड़ों की संख्या बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने योगी सरकार को दो हफ्तों के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। एक के बाद एक अपराधियों का एनकाउंटर कर पीठ थप-थपा रही उत्तर प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में फर्जी मुठभेड़ होने का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) के वकील संजय पारीख ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा पिछले एक साल में किए गए 500 एनकाउंटर को फर्जी बताया है। इन एनकाउंटर में करीब 58 लोग मारे गए हैं। बता दें कि इस एनकाउंटर मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था।

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