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वंदना टेटे, कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता

रांची : झारखंड पाठ्य पुस्तक समिति ने कक्षा 7 की हिंदी पुस्तक ‘भाषा मंजरी’ में कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता वंदना टेटे की कविता ‘हम भी जा रहे हैं’ को शामिल किया है| इस जानकारी को साझा करते हुए वंदना टेटे ने अपनी फेसबुक वॉल पर झारखंड पाठ्य पुस्तक समिति का आभार व्यक्त किया है| वंदना टेटे की इस फेसबुक पोस्ट की सोशल मीडिया में बहुत सराहना हो रही है और लोग उनकी कविता के झारखण्ड में सातवीं कक्षा की पाठ्य पुस्तक में शामिल होने पर उन्हें बधाई दे रहे हैं| खबर के लिखे जाने तक साढ़े पांच सौ से ज्यादा लोगों ने उनकी इस पोस्ट को लाइक कर लिया था और लगभग दो सौ लोगों ने उन्हें शुभकामना संदेश लिखे थे|

आपको बता दें कि वंदना टेटे हिंदी एवं खड़िया में लेख, कविताएँ, कहानियाँ लिखतीं हैं जो स्थानीय एवं राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं| उनके लोकगीत और साहित्य आकाशवाणी से भी प्रसारित हो चुके हैं। वे सामाजिक विमर्श की पत्रिका ‘समकालीन ताना-बाना’, बाल पत्रिका ‘पतंग’ (उदयपुर से प्रकाशित) का संपादन एवं प्रकाशन कर चुकी हैं|

वे झारखंड आंदोलन की राजनीतिक पत्रिका ‘झारखंड खबर’ (रांची) के साथ उप-संपादन भी कर चुकीं हैं। उन्होंने झारखंड की पहली बहुभाषायी पत्रिका ‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ (2004), खड़िया मासिक पत्रिका ‘सोरिनानिङ’ (2005) तथा नागपुरी मासिक पत्रिका ‘जोहारसहिया’ (2006) का संपादन-प्रकाशन किया है। उनकी पुस्तकें पुरखा लड़ाके, किसका राज है, झारखंड : एक अंतहीन समरगाथा, पुरखा झारखंडी साहित्यकार और नये साक्षात्कार, असुरसिरिंग, आदिवासी साहित्य : परंपरा और प्रयोजन और आदिम राग प्रकाशित हो चुकी हैं।

वे 2004 में आदिवासी व देशज लेखकों, भाषाविद्, संस्कृतिकर्मी, साहित्यकार और बुद्धिजीवियों के संगठन ‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ की संस्थापक महासचिव हैं। वर्तमान में वे झारखंड की आदिवासी एवं देशज भाषा-साहित्य व संस्कृति के संरक्षण, संवर्द्धन और विकास के लिए प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन, रांची, के साथ सृजनरत हैं और रांची में रहतीं हैं।

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