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पुणे, मुंबई
पुणे के डॉक्टरों ने चार साल की बच्ची का पहला स्कल ट्रांसप्लांट कर डॉक्टर्स ने इतिहास रचा है। डॉक्टर्स ने दावा किया है कि यह भारत में सफलतापूर्वक पहली पहली बार खोपड़ी का सफल प्रत्यारोपण किया गया है, यानी स्कल ट्रांसप्लांट सर्जरी। 4 साल की बच्ची के 60 फीसदी डैमेज हो चुकी खोपड़ी की जगह थ्री-डायमेंशनल इंडीविजुअलाइज पॉलिथीन बोन लगाई है।

देश में पहली बार पुणे में स्कल (खोपड़ी) ट्रांसप्लांट की सर्जरी सफल हुई है। यह एक तरह की हड्डियां हैं जिन्हें अमेरिका स्थित एक कंपनी ने बनाया है। इनकी लंबाई और आकार डैमेज स्कल के बराबर था। जिस बच्ची का खोपड़ी का ट्रांसप्लांट किया गया है वो सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गई थी। जिसके चलते उसका खोपड़ी डैमेज हो गया। उसे दो बड़ी सर्जरी के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी।

उसे इसी साल दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया और 18 मई को उसकी खोपड़ी ट्रांसप्लांट की सर्जरी हुई। बच्ची की मां का कहना है कि वह स्कूल भी जाती है और दोस्तों के साथ खेलती भी है। वह पहले की तरह खुश रहती है। उसके पिता स्कूल बस के ड्राइवर हैं।

बच्ची का इलाज करने वाले भारती अस्पताल के डॉक्टर जितेंद्र ओस्वाल का कहना है कि एक्सिडेंट का असर बहुत ही घातक था। उसे अचेत अवस्था में अस्पताल में लाया गया। उसके सिर से बहुत खून निकल रहा था। जिसके बाद उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया। सीटी स्कैन में पता चला कि उसकी स्कल के पीछे की हड्डी में फ्रैक्चर आया है जिसके चलते वह सूज गई है।

इस हड्डी को ऑप्टिकल स्कल कहा जाता है। जिसका प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है। इसके कारण मस्तिष्क में तरल पदार्थ यानी एडीमा का अधिक संचय हुआ। जब दाखिल होने के 48 घंटे बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आया तो दोबारा सीटी स्कैन कराया गया जिसमें एडीमा के बारे में पता चला था। कृत्रिम वेंटीलेशन और मेडिकल थेरेपी दी गई लेकिन एडीमा कम नहीं हुआ। जिसके बाद सर्जरी करनी पड़ी। सर्जरी के बाद बच्ची की हालत में सुधार होने लगा है। इस तकनीक का प्रयोग पहली बार भारत में सफल हुआ है।

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