Print Friendly, PDF & Email

अर्थव्यवस्था की पोल खोलकर मोदी सरकार के खिलाफ बागी तेवर दिखाने वाले यशवंत सिन्हा ने अब अपना सियासी मंच बना लिया है। इस का नाम रखा है राष्ट्र मंच।
गौरतलब है कि इसमें उनका साथ देने के लिए सामने आए हैं शत्रुघ्न सिन्हा। जाहिर है वे इसलिए साथ देने को तैयार हुए हैं क्योंकि वे बीजेपी से काफी समय से असंतुष्ट हैं।

सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा द्वारा शुरू किए गए नए राजनैतिक मंच में शामिल होने के लिए नेताओं के एक समूह का नेतृत्व किया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि उनका राष्ट्र मंच एक राजनैतिक कार्रवाई समूह है। वह केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन शुरू करेगा।

तृणमूल कांग्रेस सांसद दिनेश त्रिवेदी, कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी, एनसीपी सांसद माजिद मेमन, आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता और जेडीयू नेता पवन वर्मा उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने मोर्चा शुरू करने के लिए आयोजित इवेंट में हिस्सा लिया। आरएलडी नेता जयंत चौधरी और पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल और हरमोहन धवन भी उपस्थित थे।

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह मंच में इसलिए शामिल हुए हैं, क्योंकि उनकी पार्टी ने अपनी राय जाहिर करने के लिए उन्हें मंच नहीं दिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मोर्चे का समर्थन करने के उनके फैसले को पार्टी विरोधी गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यह राष्ट्र हित में है।

यशवंत सिन्हा ने मौजूदा स्थिति की तुलना 70 साल पहले के समय से की, जब महात्मा गांधी की आज ही के दिन हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों को ‘भिखारियों की स्थिति’ में ला दिया है। उन्होंने सरकार पर अपने हितों के अनुरूप ‘मनगढ़ंत’ आंकड़े पेश करने का आरोप लगाया।

यह भी पढ़ें :  दुष्कर्म व हत्याकांडों को रोकने में क्यों नाकाम है सरकार

यशवंत सिन्हा ने कहा, ‘यह कोई संगठन नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन है।’ उन्होंने आर्थिक और विदेश नीतियों के लिए सरकार पर हमले किए। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी में सभी लोग डरे हुए हैं। हम नहीं।’

उन्होंने कहा कि देश में संवाद और चर्चा ‘असभ्य, एकतरफा और खतरनाक’ हो गई है।

भाजपा सरकार में ही वित्त और विदेश मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा का यह कदम बताता है कि भाजपा के अंदर जेआब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उनकी ही पार्टी के नेता जब इस कदर पार्टी से खफा हैं तो आम जनता का क्या कहा जाए।

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓