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कोलेबिरा (सिमडेगा) से ग्रास रूट रिपोर्टर देवदर्शन बड़ाईक की रिपोर्ट।
कोलेबिरा (सिमडेगा)। बुधवार शाम को कोलेबिरा कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय की 22 छात्राओं को पेट दर्द की शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा हेतु भर्ती करना पड़ा। विद्यालय की प्रभारी वार्डन अनिमा टोप्पो के मुताबिक शुरू में 3 छात्राओं ने पेट दर्द की शिकायत की उसके बाद लगातार कई अन्य छात्राओं को भी पेट दर्द की शिकायत होती गयी। आनन फानन में सभी को चिकित्सा केंद्र ले जाया गया।

सीमा रोस टोपो, अस्सी कुमारी, शबनम मिंज, पुनीता कुमारी, अनामिका कुल्लू, आरती कुमारी, लीलावती कुमारी, गीता कुमारी, सोनिया खातून, ममता कुमारी, चांदनी कुमारी, जयंती कुमारी, करीना कुमारी, ललिता कुमारी ,सीमा कुमारी, रेलन कौनगाड़ी ,सोनिया कुमारी, अमीषा डांग, दसवीं कुमारी, संध्या बारला एवं हेलन बागे नामक पीड़ित बच्चियों का ईलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. राकेश कुमार ने किया।

ग्रास रूट रिपोर्टर देवदर्शन बड़ाईक को डॉ. राकेश ने बताया कि बच्चियों की तबियत सम्भवतः फ़ूड पॉइज़निंग के कारण बिगड़ी थी और तत्काल प्राथमिक उपचार कर उन्हें हॉस्टल भेज दिया गया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक शाम के नाश्ते में बच्चियों को चूड़े का पोहा दिया गया था। पोहा खाने के बाद एक के बाद एक बच्चियों को पेट दर्द की शिकायत होने लगी थी। फिलहाल सभी बच्चियां खतरे से बाहर हैं और उन्हें प्राथमिक उपचार और दवा देकर हॉस्टल भेज दिया गया है।

सवाल यह उठता है कि बच्चियों को परोसे जाने से पूर्व खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच में लापरवाही क्यों की जाती है? बताते चलें की सूबे में संचालित आवासीय विद्यालयों में अव्यवस्था की शिकायतें पहले भी सुर्खियां बटोरती रही हैं।

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