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नई दिल्ली। गत 10 मार्च को नई दिल्ली स्थित गाँधी शांति प्रतिष्ठान में सावित्रीबाई फुले स्मृति दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन तीन सामाजिक संस्थाओं उमंग किरण, फाईट फॉर राईट और सारथी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। उमंग किरण संस्था की संस्थापिका अलका भारतीय ने बताया कि देश की प्रथम शिक्षिका के रूप सावित्रीबाई फुले का नाम हमेशा अमर रहेगा। बालिका शिक्षा के क्षेत्र में जिस तरह उन्होंने हिम्मत दिखा कर सामन्ती समाज के विरुद्ध जाकर स्त्रियों में शिक्षा की अलख जगाई थी, वह बहुत हिम्मत का काम था उस समय पुरे समाज और सत्ता से लड़ कर कन्याओं के लिए विद्यालय खोलना बहुत ही क्रांतिकारी कदम था हम इस कार्यक्रम का आयोजन इसलिए कर रहे हैं कि आज की पीढ़ी सावित्रीबाई फुले के विचारों और योगदान से अवगत होकर उनसे प्रेरणा ले सके 

कार्यक्रम में सारथि ग्रुप से जुड़े कलाकरों ने स्त्रियों के खिलाफ बढ़ती यौन हिंसा और अत्याचार पर केन्द्रित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। वहीं डिंपल रॉय की टीम के बच्चों ने योग शिक्षा का महत्व बताते हुए योग पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। करुणा और खुशबू ने सावित्रीबाई फुले को याद करते कविता-पाठ किया।

प्रोफ़ेसर अवतार सिंह ने सावित्रीबाई फुले पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जबजब स्त्रियों की अधिकारों की बात होगी, तबतब सावित्रीबाई फुले को याद किया जायेगा पिछले एक दशक से स्त्री अधिकारों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्त्ता जुलेखा ज़बीं  ने अपने भाषण में कहा कि समाज को राजनीती से हटा कर देखा नहीं जा सकता, उस समय भी राजनैतिक स्थ्तियाँ विपरीत थी, फिर भी सावित्रीबाई फुले ने अपने काम को निडरता से अंजाम दिया

कार्यक्रम में डेरिक फ्रांसिस भी उपस्थित थीं जिन्होंने एक सड़क हादसे में अपनी बेटी को खोने के बाद सड़क सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। 2009 में एक सड़क हादसे में उनकी बेटी की मृत्यु हो गयी थी, उस हादसे के बाद उन्होंने यह प्रण ले लिया कि वे अपना पूरा जीवन सड़क सुरक्षा और ट्रेफिक नियमों के लिए जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित कर देंगीं और तब से वे इन्दिरापुरम के नजदीक नेशनल हाइवे पर स्वैच्छिक रूप से ट्रैफिक कंट्रोल करती हैं।

कार्यक्रम में लेखिका पुष्पा विवेक ने अपने विचार रखे और सावित्रीबाई फुले पर एक कविता भी सुनाई।  इस अवसर पर आयोजकों में उमंग किरण की संस्थापिका अलका भारतीय , फाईट फॉर राईट के संथापक दलवीर सिंह और सारथी के संस्थापक राज राय मौजूद थे।

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