फ़िल्म का नाम : टाइगर ज़िन्दा है  Tiger Zinda Hai (2017)
हिंद वॉच मीडिया रेटिंग :  3/5 तीन स्टार 
सेंसर सर्टिफिकेट : U/A
जॉनर : एक्शन थ्रिलर
अवधि : 2 घंटा, 41 मिनट  
निर्माता : यशराज फिल्म्स
निर्देशक : अली अब्बास जफर
लेखक : नीलेश मिश्रा और अली अब्बास जफर 
कलाकार : सलमान खान, कैटरीना कैफ, सज्जाद डेलाफ्रूज, गिरीश कर्नाड, परेश रावल, कुमुद मिश्रा, अंगद बेदी और अनुप्रिया गोयनका आदि।
गीत : इरशाद कामिल  
संगीत : विशाल शेखर

वियों का मायाजाल है,यह टाइगर। यह कभी सुल्तान के रूप में दिखेगा और कभी बजरंगी भाईजान के रूप में। रजत पर्दे पर हमारे सामने रोशनी के रंगों का मायाजाल ही तो होता है। जब यह मायाजाल चार्ली चैप्लिन जैसा कलाकार रचता है तो वह सच को उजागर करता है और व्यवसायिक सफलता के सदाबहार झंडे गाड़ता है।

यह छवियों का मायाजाल जब कोई व्यापारी रचता है तो वह आपको सच से इतनी दूर ले जाता है कि आप उसे भूल जायें। “टाइगर ज़िन्दा है” एक व्यापारी-कलाकार की ब्लॉकबस्टर सफलता है। दोनों ही प्रतिभावान हैं, लेकिन इनके सरोकार अलग हैं।

टाइगर बंदा-ए-खुदा है। वह देश के लिए अपनी जान हथेली पर लिए रहता है। उसमें देशभक्ति से ज़्यादा देशभक्ति का जुनून है। हम हिन्दुस्तानियों को भी देशभक्ति से ज़्यादा इसका जुनून अच्छा लगता है। यह जुनून भावनात्मक ही नहीं, भौतिक रूप से भी इतना प्रभावी होता है कि हिटलर जैसी शक्ति पैदा हो जाती है। टाइगर की इमेज “लार्जर दैन लाइफ” है। ‘टाइगर जिंदा है’ में देशभक्ति का रस भरपूर मिलेगा, इसकी गारंटी है।

सलमान खान घोड़े पर सामने आ जायें तो ‘आईएससी’ जैसे आतंकवादी संगठन की पूरी टीम को लोहे के चने चबाने पड़ते है। अगर उन्होंने अपनी शर्ट उतार दी तो फिर उनके फैन्स समझ जाते हैं कि अब तो दुश्मन की खैर नहीं है। वे स्वाभाविक रूप से बहुत उत्तेजित हो जाते हैं और तालियाँ बजाने लगते हैं। यह मोमेंट, यह उत्तेजना और यह किक ही सलमान खान को सुपरस्टार बनाती है। फ़िल्म की रीलिज के एक सप्ताह पहले से मुंबई के लगभग सारे सिनेमा हॉल एडवांस बुकिंग कर रहे थे। रीलिज के पहले ही फ़िल्म हाउसफुल हो गयी थी।

यह एक्शन पैक मूवी है जिसमें गाड़ियों के परखच्चे धुएँ और धुल में उड़ते हुए दिखेंगे। कहानी टाइगर के इर्द-गिर्द ही नहीं घुमती है, बल्कि यह सलमान खान स्टाइल की ही फ़िल्म है। मूल रूप से यह एक्शन थ्रिलर जॉनर की मूवी है, जिसे पसंद करने वाले शायद दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं।

‘एक था टाइगर’ में भारत की खुफिया एजेंसी “रॉ” का एजेंट अविनाश सिंह राठौड़ उर्फ टाइगर (सलमान खान) और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की एजेंट जोया (कैटरीना कैफ) को एक दूसरे से प्यार हो जाता है और दोनों लापता हो जाते हैं। समय बीतता है और आतंकवादी संगठन आईएससी भारतीय और पाकिस्तानी नर्सों को बंधक बना लेता है। यह इराक और सीरिया का आतंकवादी संगठन है जिसका इराक के तेल के कुएँ पर अधिकार है।

भारतीय नर्सों को छुड़ाने की ज़िम्मेदारी “रॉ” पर आती है। “रॉ” के चीफ शेनॉय (गिरीश कर्नाड) को पूरा विश्वास है कि टाइगर इस मिशन को कामयाब बना सकता है, जो सरकारी फाइल में मर चुका है। जबकि टाइगर अपनी पत्नी जोया और अपने बेटे के साथ ऑस्ट्रिया में रह रहा है। ‘’रॉ’’ के लिए उस तक पहुँचना कोई मुश्किल काम नहीं है। ‘रॉ’ और ‘आईएसआई’ की टीम मिलकर एक मिशन पर काम करती है। अब देखना ये है कि दोनों देश की खुफिया एजेंसियाँ और टाइगर बंधक नर्सों को कैसे बचाते हैं? फ़िल्म आपको बोर होने का मौका नहीं देती है।

सलमान खान अपने रोल में जमे हैं और उन्हें जलवा दिखाने का मौका भी सबसे ज़्यादा मिला है। एक्शन सीन तो उनके लाजवाब होते ही हैं। अपने डांस से भी वे दर्शकों को रीझाते हैं। फ़िल्म में कैटरीना ने भी अच्छा एक्शन किया है। खासकर अबु उस्मान के राइट हैण्ड बगदादी को मारने के सीन में बेहतरीन काम किया है। गिरीश कर्नाड “रॉ” के चीफ की भूमिका में दमदार और असरदार लगे हैं। परेश रावल तो एक दिग्गज अभिनेता हैं, अपनी छाप छोड़ने में वे सफल रहे हैं। बाकी के सारे कलाकारों ने अच्छा काम किया है।

फ़िल्म का अच्छा स्क्रीन प्ले लिखना किसी साधना से कम नहीं है। इसका स्क्रीन प्ले बेहतरीन है और नैरेशन भी कमाल का है। निर्देशक अली अब्बास जफर देशभक्ति का जज्बा बनाये रखते हैं।

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उन्होंने सलमान खान की एक्शन हीरो की इमेज को जमकर भुनाया है। फ़िल्म की टेक्निकल टीम का काम शानदार है। काश यह देशभक्ति की भावना हमें देश के प्रति ईमानदार भी बनाये!

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