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मुंबई 
ई ऐतिहासिक फिल्मों की गवाह रही राजकपूर के 70 साल पुराने आर के स्टूडियो को बेचने की कवायद अब शुरू हो गई है। मुंबई के चेम्बूर स्थित इस स्टूडियो को कपूर परिवार ने बेचने का मन बना लिया है। दरअसल, पिछले काफी समय से इस स्टूडियो में ज्यादा काम नहीं होता और इतनी लागत के बाद भी इस स्टूडियो को ज्यादा लोग शूटिंग के लिए किराये पर नहीं ले रहे थे।

ये स्टूडियो मुनाफे में नहीं चल रहा था। इसलिए कपूर परिवार ने मिलकर ये फैसला किया है। ये स्टूडियो तक़रीबन 2 एकड़ जमीन पर बनाया गया है और यहां ने अपनी अधिकतर फिल्मों की शूटिंग की है। आर के स्टूडियो के न चलने का एक कारण ये भी है कि यह मुंबई के उस इलाके में मौजूद है, जहां अब शूटिंग बेहद कम होता है।

पिछले साल 16 सितंबर में स्टूडियो में ‘सुपर डांसर’ के सेट पर आग लग गयी थी जिससे इसका ग्राउंड फ्लोर जल गया था। हादसे में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा था। ऋषि कपूर ने स्टूडियो को आधुनिक टेक्नॉलजी के साथ फिर से तैयार कराने की इच्छा व्यक्त की थी, लेकिन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने कहा कि यह व्यवहारिक नहीं था।

रणधीर कपूर ने बताया, ‘हां, हमने आरके स्टूडियो को बेचने का फैसला किया है। यह बिक्री के लिए उपलब्ध है। स्टूडियो में आग लगने के बाद उसे फिर से बनाना प्रैक्टिल नहीं था।’ साल 1988 में राजकपूर के निधन के बाद उनके बड़े पुत्र रणधीर ने स्‍टूडियो की जिम्‍मेदारी अपने कंधों पर ली थी।

आरके बैनर के तहत बनी फिल्मों में ‘आग‘, ‘बरसात‘, ‘आवारा‘, ‘श्री 420‘, ‘जिस देश में गंगा बहती है‘, ‘मेरा नाम जोकर‘, ‘बॉबी’, ‘सत्यम शिव सुंदरम’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ आदि शामिल हैं। आरके बैनर के तले बनी आखिरी फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ थी, जिसे ऋषि कपूर ने निर्देशित किया था। राजकपूर के 1988 में निधन के बाद उनके बड़े पुत्र रणधीर ने स्टूडियो का जिम्मा संभाला। बाद में राजकपूर के सबसे छोटे पुत्र राजीव कपूर ने ‘प्रेम ग्रंथ’ का निर्देशन किया।

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