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सबका साथ सेवक विकास का नारा लगाकर भारी बहुमत से सत्ता में आई मोदी सरकार के शासन काल में विकास तो खोजने पर नहीं मिलता हैं सिर्फ बेरोजगारी, हिंसा और साम्प्रदायिक मसले ज्यादा उजागर हुई हैं।

अब तक ये बातें जब कही जाती थीं तो सरकार इसे विपक्ष के साजिश भरे आरोप बताकर रद्द कर देती थी। पर अब तो सरकारी और आधिकारिक आंकड़ें भी सरकार की चुगली कर रहे हैं।

दरअसल, लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने कहा कि 2017 में सांप्रदायिक हिंसा की सर्वाधिक 195 घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुईं, जहां 44 लोग मारे गए और 542 घायल हुए।

देशभर में साल 2016 के मुकाबले 2017 में सांप्रदायिक घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है, जबकि इसके पहले इसमें गिरावट दर्ज की गई थी। 2017 में सांप्रदायिक घटनाओं में 111 लोग मारे गए और 2,384 घायल हुए। वहीं, 2016 में 86 लोगों की मौत हुई थी जबकि घायलों की संख्या 2,321 रही थी।

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने कहा कि 2017 में सांप्रदायिक हिंसा की सर्वाधिक 195 घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुईं, जहां 44 लोग मारे गए और 542 घायल हुए।

कर्नाटक में बीते साल 100 सांप्रदायिक घटनाएं हुईं, जिनमें नौ लोग मारे गए और 229 घायल हो गए। राजस्थान में ऐसी 91 घटनाएं हुईं जिनमें 12 लोग मारे गए और 175 घायल हो गए। मंत्री ने कहा कि 2017 में बिहार में 85 सांप्रदायिक घटनाएं हुईं जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई और 321 घायल हो गए।

मध्य प्रदेश में 60 घटनाएं हुईं और इनमें नौ लोग मारे गए एवं 191 घायल हो गए। उन्होंने कहा कि पिछले साल पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा की 58 घटनाएं हुईं, जिनमें नौ लोग मारे गए और 230 घायल हो गए। गुजरात में 50 घटनाएं हुईं और आठ लोग मारे गए तथा 125 घायल हो गए।

सबसे ज्यादा पते की बात तो यह है कि केंद्र सरकार ने 21 दिसंबर, 2017 को सदन में जो आंकड़े रखे थे, उनमें भाजपा शासित राज्यों की स्थिति ज्यादा खराब थी।

अब ऐसे में जब भाजपा के राज्यों की हालत सबसे ज्यादा खराब है तो बीजेपी को विकास के दावे ठोंकना बंद कर देना चाहिए।

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