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समाज में कभी मां को देवी का दर्जा दिया जाता है तो कभी डायन का। हालांकि समय और हालत के हिसाब से आदमी हो या औरत सही और गलत के रास्ते अपने मुताबिक़ चुनता है। लेकिन जब मामला अबोध बच्चों का हो तो इंसानियत और मातृत्व से बढ़कर कुछ नहीं होता। लेकिन आजकल तो माएं ही अपने बच्चों को ठुकरा रही हैं। ये कैसा समाज है ?
जन्म देते ही जुड़वां बेटियों को मां ने ठुकरा दिया तो उसका इलाज करने वाली अविवाहित महिला डॉक्टर डॉ. कोमल यादव ने उन्हें अपना लिया। अस्पताल प्रबंधन ने समझाया लेकिन उसने एक नहीं सुनी। औपचारिकताएं पूरी कर सोमवार को वह दोनों बेटियों को लेकर अपने गांव पहुंची तो पूरे गांव ने उसे हाथोंहाथ लिया। बेटी बचाने की यह मिसाल पेश की गुलावठी के गांव ईसेपुर निवासी सीताराम यादव की 29 वर्षीय अविवाहित बेटी डॉ. कोमल ने। डॉ. कोमल यादव वर्तमान में फर्रुखाबाद के एक निजी अस्पताल में तैनात हैं। डॉक्टर कोमल के मुताबिक उनकी ड्यूटी के दौरान 10 दिन पहले एक महिला ने अस्पताल में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था।
कुछ दिन पहले एक ऐसी ही खबर और आई थी जहाँ मान ने अपने बच्चे को मरने के लिए छोड़ दिया था। खबर बिहार से थी कि बिहार मुजफ्फरपुर में एक कलियुगी मां ने ममता को कलंकित करते हुए दूधमूहे बच्चे को सड़क पर छोड़ दिया और खुद फरार हो गयी। ब्रम्हपुरा थाना के एक नर्सिंग होम के पास फल की टोकरी में बच्चे को मां ने छोड़ दिया। जब बच्चा रोया तब जाकर लोगों को पता चला। स्थानीय लोगों ने जब पुलिस को सूचना दी। ब्रम्हपुरा पुलिस ने बच्चे को स्थानीय केजरीवाल अस्पताल में भर्ती करा दिया है। अस्पताल प्रशासक बी बी गिरी ने बताया कि बच्चा स्वस्थ्य है। इस मामले में जिला बाल संरक्षण विभाग को सूचना दे दी गयी है ताकि बच्चे को लेकर उचित कानूनी कार्रवाई हो सके।
यह हाल बिहार का नहीं बल्कि पूरे देश का है। इंसानियत और मानवता को शर्मसार करते ऐसे कृत्यों को देख खुद के इंसान होने पर शर्म आने लगती है। वो तो कोमल यादव जैसे कुछ लोग है जो आज भी भरोसा इंसानियत से उठने नहीं देते।

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