कश्मीर में जारी लगातार हिंसा से देशभर में आक्रोश की भावना बढ़ती जा रही है। रोज सेना के जवानों के सीमा पर शहीद होने की खबरें आ रही हैं।

देश की सियासत का रुख ऐसा है कि नेता सिर्फ बयानबाजी कर अपना कर्तव्य पूरा कर लेते हैं और टीवी और मीडिया भी पैनल डिस्कशन के नाम पर अपनी ड्यूटी बजा लेता है।

लेकिन फिर अगले दिन सीमा पर पाक की नापाक हरकतों का सिला भारतीय सैनिकों को चुकाना पड़ता है। नरेंद्र मोदी देश दुनिया का भ्रमण कर रहे हैं। मालदीव की परेशानी हाल करने की बात कर रहे हैं लेकिन खुद की सीमा पर हो रही हिंसा का अल नहीं निकाल पा रहे हैं।

क्या उनकी खामोशी और फैसला न ले पाने के चलते ऐसा हो रहा है। लगता तो यही है। इस बाबत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कश्मीर में खूनखराबे के लिए सत्ताधारी गठबंधन को जिम्मेदार बताते हुए पीएम मोदी पर हमला बोला।

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री कोई फैसला नहीं कर पा रहे हैं और ‘अवसरवादी’ गठबंधन के चलते सैनिकों को अपना खून बहाना पड़ रहा है। उधर बीजेपी ने इशारों में सीएम महबूबा मुफ्ती पर ही निशाना साधा और कहा कि गोलियों और रक्तपात के बीच पाकिस्तान से बातचीत करना सही नहीं है।

राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार पर कश्मीर के लिए ‘अस्तित्वहीन’ नीति अपनाने का आरोप लगाया और खूनखराबे के लिए बीजेपी-पीडीपी गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन में उभरे मतभेदों का जिक्र करते हुए कहा, ‘पीडीपी कह रही है कि पाकिस्तान से बातचीत करो। बीजेपी की रक्षा मंत्री कह रही हैं कि पाकिस्तान को कीमत चुकानी पड़ेगी, जबकि हमारे सैनिकों को बीजेपी-पीडीपी के अवसरवादी गठबंधन और कश्मीर की अस्तित्वहीन नीति के कारण अपना खून बहाना पड़ रहा है। मोदी जी निर्णय नहीं कर रहे हैं।’

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गौरतलब है कि महबूबा ने पाकिस्तान से बात करने की बात की थी और कहा था कि भले ही लोग उन्हें देशद्रोह कहें लेकिन बातचीत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अगर हम इसकी बात नहीं करेंगे तो कौन करेगा? लेकिन सवाल यह है कि मोदी सरकार इस समस्या के निदान के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाती है?

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