(फाइल फोटो)
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पहला दृश्य : सुबह करीब 8 से 9 के बीच का समय,स्थान – मुंबई का एक बड़ा होटल। अपने राज्य के आला अफसरों के साथ दुनिया के एक बड़े औधोगिक घराने के वरीय प्रतिनिधि से मुख़ातिब झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुबर दास। बेबाक अंदाज में शुरुआत – हाँ बतायें, आप हमारे राज्य में किस क्षेत्र में और किस स्थान पर निवेश करेंगे? कितना निवेश करेंगे, राज्य सरकार से क्या अपेक्षा रखते हैं और हां कितने लोगों को रोजगार देंगे आप? उक्त समूह के प्रतिनिधि और झारखण्ड के अधिकारियों का दल अवाक। थोड़ी देर सन्नाटा। पुनः मुख्यमंत्री अपने राज्य की तत्कालिन मुख्य सचिव से मुख़ातिब – इनका प्रस्ताव लीजिये और क्रियान्वयन आरंभ कीजिये। बड़े औधोगिक घराने के वरीय प्रतिनिधि और उनके दल में शामिल लोग एक दूसरे का मुंह देखने लगे। गंभीर और भावहीन मुद्रा में मुख्यमंत्री ने कंपनी के प्रतिनिधियों से पुछा – कोई समस्या तो नहीं,बतायें कब से शुरू हो रहे हैं आप लोग? वरीय प्रतिनिधि ने कहा – जी हां ,हम अनुकुल समय पर इस दिशा में विचार करेंगे। पहले जगह आदि तो मिल जाये। रघुबर दास बोल पड़े – मतलब ….झारखण्ड की पूरी सरकार अपने मुख्यमंत्री और दो मंत्रियों के साथ आपके निवेश प्रस्ताव को हाथों-हाथ अमली जामा पहनाने के लिये तत्पर है और आप अनुकुल समय की बात कर रहे हैं। कहां प्लांट लगाना चाहेंगे आप – रांची में, जमशेदपुर में या कहीं और? देखिये झारखण्ड की जनता ने विकास की ओर अग्रसर होने का जनादेश दिया है, आप अविलंब आयें और हम तत्पर होकर आपके प्रस्ताव क्रियान्वयन में सहयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने उक्त औधोगिक घराने के वरीय प्रतिनिधि को संबोधित करते हुए आगे कहा – जनाब ,जब मैं उप मुख्यमंत्री था तो आप से और आप के समूह के वरीय लोगों से मुलाकात हुई थी न इंग्लैंड में? उस वक़्त भी निवेश विमर्श तक ही रह गया था ना। ख़ैर छोड़िये , अब आ जायें –हम आपको श्रम,खनिज,जगह और माहौल सब देंगे। ठीक है,रांची आयें आप लोग। कब आ रहे हैं? तारीख बतायें, मैं तैयार मिलूंगा।

उसी बैठक में सॉफ्टवेयर की एक नामी कंपनी के उच्चपदस्थ ने कहा- आप के यहां माहौल ही नहीं है। अगला निवेश क्या करें …पूर्व का ही अटका पड़ा है। मुख्यमंत्री रघुबर दास तत्कालीन उद्योग सचिव से मुख़ातिब – क्या समस्या है? क्योँ अटका पड़ा है इनका प्रोजेक्ट? उद्योग सचिव ने कहा- फलां विभाग में कुछ प्रॉब्लम है ,सर निपट जायेगा। मुख्यमंत्री बोले – कहां हैं फलां? अभी बुलायें। आनन- फानन उक्त विभाग के हाकिम हाजिर हुए। मुख्यमंत्री ने पूछा – क्या सुनना पड़ रहा है? ऐसे होगा डेवलपमेंट। मुख्य सचिव से मुख़ातिब होकर रघुबर बोले – मैडम ,15 दिनों में सुलझ जायेगी न इनकी समस्या। मुख्य सचिव ने उक्त विभागीय अधिकारी को उनके नाम से संबोधित करते हुए कहा -…………………….आई होप विदीन अ वीक। मुख्यमंत्री से मैडम बोलीं –सर , जल्द ही हो जायेगा। मुख्यमंत्री ने गंभीर स्वर में कहा- पक्का ना ,फिर उक्त सॉफ्टवेयर कंपनी के उच्चपदस्थ से बोले –आप की ये समस्या निपटी मान लें।आप 22 को रांची आयें वर्तमान प्रोजेक्ट को गति दें और नया प्रोजेक्ट चालू करें ….मैं स्वयं मोनिटर करूंगा।

दुसरा दृश्य : स्थान – हज़ारीबाग शहर का मैदान। पंचायत प्रतिनिधियों का एक कार्यक्रम। आयोजन के दौरान एक ओर से अशोभनीय टिप्पणी और असंसदीय विरोध। तत्काल उठ खड़े हुए रघुबर , माइक थामा और बोल पड़े – देखो ….अनुशासन की हद में रहो।जनता ने राजनीति की रोटी सेंकने के लिये नहीं ,बल्कि विकास के लिये जनादेश दिया है। अब तक यही नाटक होता आया, लेकिन अब नहीं। अब सिर्फ विकास होगा ….विकास।
उपरोक्त सन्दर्भों व अन्य घटनाक्रम में मुख्यमंत्री रघुबर दास के बेलौस अंदाज का उल्लेख आज प्रासंगिक हो गया है क्योंकि विभिन्न बैठकों के दौरान अधिकारियों को बेबाक खरी-खोटी और राजनीतिक उद्दंडता पर उतारू पक्ष विपक्ष को दो टूक सुनाने के रघुबर दास के अंदाज को शुक्रवार को झारखण्ड की जनता ने अपनी पसंद की मुहर लगा दी। सूबे में संपन्न 34 नगर निकायों के चुनाव में बीजेपी ने विपक्ष के सारे दावों और उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

तीसरा दृश्य : झारखण्ड गठन के बाद सूबे में पहली बार दलीय आधार पर संपन्न चुनाव में तमाम आकलन धड़ाम हो गये। बीजेपी ने खूंटी, पाकुड़ समेत 34 में से 21 निकायों में जीत का परचम लहरा कर विरोधियों की बोलती बंद कर दी है। राज्य के सभी 5 नगर निगमों (रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, आदित्यपुर और मेदिनीनगर) में मेयर और डिप्टी मेयर की सीटों पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया है। नगर परिषदों में भी जनता ने रघुबर सरकार और भाजपा पर विश्वास की मुहर लगा कर विपक्ष की जय के गुणा भाग को नकार दिया।

राजधानी रांची में तमाम विवादों और दावों पर विराम लगाते हुए आखिरकार बीजेपी ने जिस जोड़ी पर विश्वास जताया था वह एक बार फिर जीत कर आ गई । मेयर आशा लकड़ा ने झामुमो की वर्षा गाड़ी को हरा दिया है वहीं डिप्टी मेयर प्रत्याशी संजीव विजयवर्गीय ने कांग्रेस प्रत्याशी राजेश गुप्ता को पटकनी दी। मतगणना के शुरुआती चरण में झामुमो की वर्षा गाड़ी से आशा लकड़ा पिछड़ गयी थीं, लेकिन बाद में आशा लकड़ा ने जो वापसी की तो दोनों के बीच जीत का अंतर लगातार बढ़ता चला गया। आशा लकड़ा ने 38 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की। आशा लकड़ा को 1,49,623 वोट मिले, जबकि वर्षा गाड़ी को 1,10,007 वोट मिले।

नगर निकाय के इस चुनाव को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव के पहले का सेमीफाइनल कहा जा रहा था। इस लिहाज से देखा जाय तो बीजेपी ने अपने विरोधियों को चुप तो जरूर करा दिया है और शहर की जनता के मार्फ़त यह सन्देश दे दिया है कि फ़िलहाल पब्लिक को रघुबर सरकार पसंद है।

निकाय चुनाव परिणाम में भाजपा ने राज्य के सभी 5 नगर निगमों (रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, आदित्यपुर और मेदिनीनगर) में मेयर और डिप्टी मेयर की सीटों पर कब्जा कर लिया और नगर परिषदों में भी कमल खिला लेकिन कुछ जगहों पर मिली हार भी उसके लिए चिंता का सबब है। प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा के संसदीय क्षेत्र में पार्टी को करारा झटका लगा है। यहां झामुमो को जीत मिली है।उल्लेख अप्रासंगिक नहीं होगा कि पूर्व मुख्य सचिव के पति और राज्य के गृह सचिव रह चुके आइएएस ज्योति भ्रमर तुबिद भी इसी इलाके से चुनावी वैतरणी पार उतरने की जुगत में हैं। वहीं, रामगढ़ में बीजेपी के दिग्गज नेताओं और केंद्रीय मंत्री का प्रचार भी पार्टी प्रत्याशियों को जिताने में नाकाम रहा। यहां उसकी सहयोगी पार्टी आजसू ने उसे जोरदार पटकनी दी। रामगढ़ में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर आजसू ने कब्जा किया। भाजपा सरकार की मंत्री लुईस मरांडी की पुरजोर कोशिश भी काम ना आयी और संताल परगना में भी बीजेपी को करारा झटका लगा है। दुमका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।मधुपुर में भी तीर-धनुष ने कमल को खिलने न दिया। भाजपा की सहयोगी पार्टी आजसू का चुनावी गणित कुछ अलग ही रहा और आजसू ने भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में बीजेपी को जोरदार पटखनी दी।

बीजेपी नेता ये तो कह सकते हैं कि भाजपा ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा किन्तु राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक निकाय चुनाव परिणामों से मुदित होकर यदि बीजेपी नेतृत्व यह मुगालता पाल लेता है कि विपक्ष कमजोर हो गया है तो आगामी चुनाव परिणाम उसके खिलाफ़ भी जा सकते हैं।

निकाय चुनाव के रिजल्ट पर अगर नजर दौड़ायी जाय तो नगर निगमों में तो पांचों जगहों पर बीजेपी ने जरूर बाजी मार ली है लेकिन नगर परिषद और नगर पंचायत में स्थिति उतनी उत्साहजनक नहीं रही। शहरों को छोड़ दिया जाए तो कस्बों में बीजेपी की पकड़ ढीली पड़ी है। यहां ये समझना जरूरी है कि विपक्ष एक छतरी के नीचे खड़ा नहीं था। झामुमो, कांग्रेस, राजद, झाविमो ने निकाय चुनाव में कोई समझौता नहीं किया था इसलिए इनके वोटों में बिखराव ने भी बीजेपी की जीत में इजाफा किया। निकाय चुनाव परिणाम आने के बाद झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि निकाय चुनाव के जो संकेत हैं वह विपक्षी दलों के लिए जनता का सन्देश है। इस चुनाव में सभी विपक्षी पार्टियों को अपने आप को तौलने-आंकने का मौका मिला। चुनाव के परिणाम से यह साफ है कि विपक्ष को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों को एक साथ आना ही होगा।

यह तो स्पष्ट है कि भाजपा को इस जीत का मर्म कायदे से समझना होगा क्योंकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में स्थिति अलग होगी, वहां सारा विपक्ष महागठबंधन के तहत एक प्लेटफॉर्म पर होगा इसलिए बीजेपी के आगे चुनौती बड़ी होगी। ज्ञातव्य है कि झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राजद सुप्रीमो लालू यादव और झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने पिछले दिनों ही फैसला किया है कि अगला चुनाव हेमंत सोरेन के नेतृत्व में एकजुट लड़ा जाएगा।

भविष्य की गर्भ टटोलने का वक़्त अभी नहीं आया है किन्तु भाजपा नेतृत्व को जहां अपने काडर को ग्रामोंन्मुखी अभियान में लगाना होगा और आन्तरिक अनुशासन की गाँठ और कसनी होगी वहीँ विपक्ष को एकजुट विकल्प की शक्ल में जनता के बीच जाना होगा। फिलवक्त तो मोमेंटम झारखण्ड यही है कि – पब्लिक को रघुबर पसंद हैं।
(यह लेखक के निजी विचार हैं)

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