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देश में घोटाले जिस स्पीड से होते हैं उस स्पीड से विकास हो जाए तो कहना ही क्या। अब तक घोटाले करने वाली या तो नेता होते थे या फिर अपराधी तत्त्व। लेकिन बीते कुछ सालों से जो घोटाले हुए हैं उसमें सरकार, संस्था, बिजनेस और आर्थिक जगत के लोग शामिल होते दिखे हैं। पहले विजय माल्या डेस्क को मोटी चपत लगाकर विदेश भाग गया तो अब बैंकों ने ही घोटाले करने शुरू कर दिए हैं।

इन दिनों पीएनबी का फर्जीवाड़ा देश भर में सुर्खियाँ बना हुआ है। क्या है पूरा मामला आइये जानते हैं। दरअसल पीएनबी के एक डेप्युटी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने कथित तौर पर स्विफ्ट मेसेजिंग सिस्टम का दुरुपयोग किया। बैंक इसी सिस्टम से विदेशी लेनदेन के लिए LOUs के जरिए दी गई गारंटीज को ऑथेंटिकेट करते हैं। इन्हें ऑथेंटिकेशनों के आधार पर कुछ भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने फॉरेक्स क्रेडिट दी थी।

इस घोटाले में कई और चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। करीब 11,500 करोड़ रुपये के इस फर्जीवाड़े का असर दो सरकारी बैंक और एक प्राइवेट बैंक पर पड़ेगा। इन बैंकों में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और ऐक्सिस बैंक शामिल हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और ऐक्सिस बैंक ने पीएनबी द्वारा जारी किए गए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के आधार पर क्रेडिट की पेशकश की थी।

इस पूरे मामले की जड़ मे लेटर ऑफ अंडरटेकिंग यानी एलओयू शामिल है। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक खातेदार को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि खातेदार डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाए का भुगतान करे।

जनवरी महीने में पहले के LOUs की अवधि खत्म हो गई और भारतीय बैंकों की विदेशी शाखओं को कर्ज की रकम वापस नहीं मिली तो इस मामले पर से पर्दा उठा। तब उन्होंने पीएनबी से संपर्क किया जिसने बताया कि उन्हें फर्जीवाड़े से गारंटी दी गई थी।

बहरहाल शक के आधार पर पीएनबी ने अपने 10 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। पीएनबी ने सीबीआई को बताया कि आरोपी को पहला एलओयू 16 जनवरी को जारी किया गया था।

यह घोटाला जूलर नीरव मोदी ने किया है। इस घोटाले में कई बड़ी आभूषण कंपनियां मसलन गीतांजलि, गिन्नी और नक्षत्र भी विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘चार बड़ी आभूषण कंपनियां गीतांजलि, गिन्नी, नक्षत्र और नीरव मोदी जांच के घेरे में हैं। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय उनकी विभिन्न बैंकों से सांठगांठ और धन के अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रहे हैं।’ इन कंपनियों से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

महाधोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। ईडी ने गुरुवार को नीरव के 10-12 ठिकानों पर छापे मारे हैं। 11,300 करोड़ रुपये के इस फर्जीवाड़े में सीबीआई ने 31 जनवरी को एक FIR भी दर्ज की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नीरव मोदी इस समय देश में नहीं हैं।

वर्ष 2015 में बैंक ऑफ बड़ौदा में भी दिल्ली के दो कारोबारियों द्वारा 6,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था।

साल 2010 में खुदरा व्यवसाय की देर से की गई शुरुआत के बावजूद नीरव मोदी ने बड़ी तेजी से हॉलीवुड स्टार्स के इंडियन जूलर के रूप में प्रतिष्ठा अर्जित कर ली। कैट विंस्लट तथा डकोरा जॉन्सन से लेकर टराजी पी हेन्सन तक, हॉलीवुड की टॉप स्टार्स नीरव के ब्रैंड के हीरे पहनकर रेड कार्पेट पर बलखा चुकी हैं। पिछले साल प्रियंका चोपड़ा ब्रैंड ऐंबैसडर बनीं। इन सबके बीच 2013 तक नीरव अरबपतियों की फोर्ब्स लिस्ट में जगह बना चुके थे। लेकिन, उनके खिलाफ बैंक फर्जीवाड़े से उनके ब्रैंड की चमक धूमिल हो गई है।

अब देखना यह है कि इस घोटाले की जाँच निष्पक्ष तरीके से होती है या फिर यहाँ भी बड़े लोगों के नाम आते देख मामला रफा दफा कर दिए जाएगा। क्योंकि अब तक यही होता आया है। दुःख की बात है कि बैंक इस तरह का फर्जीवाड़ा कर अपनी साख के साथ समझौता कर रहे हैं। अब जनता का पैसा बैंकों के पास कितना सुरक्षित है, यह भी बड़ा सवाल है।

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