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कांग्रेस का सियासी कद धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है और मोदी सरकार की लोकप्रिय इमेज अब धुंधलाती जा रही है। यह हम नहीं कहते बल्कि एक सर्वे कहता है। यह सर्वे एक टीवी चैनल संस्था द्वारा किया गया है जो बताता है कि गठबंधन के बावजूद मोदी सरकार उतनी मजबूत नहीं होगी जितनी कि कांग्रेस।

एक राजनीतिक सर्वे से पता चला है कि नीतीश कुमार के पीएम मोदी के खेमे में आने के बावजूद अगले आम चुनाव में NDA की सीटें नहीं बढ़ने वाली हैं। अगर इस सर्वे को देश के राजनीतिक मूड का इशारा माना जाए तो यह एक ऐसा संकेत है जो बीजेपी-आरएसएस के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा सकती है।

सर्वे के मुताबिक अगर आज चुनाव होते हैं तो NDA तिहरा शतक लगा सकती है, इसे 309 सीटें मिल सकती हैं। लेकिन एनडीए का ये आंकड़ा 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली सीटों से कम है।

2014 के चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए के साथ नहीं थे बावजूद इसके NDA के खाते में 336 सीटें आईं थीं। इस बार नीतीश कुमार NDA में शामिल हैं बावजूद इसके खेमें की सीटें बढ़ती नहीं दिख रही हैं।

2014 के आम चुनाव में बिहार में बीजेपी ने 22 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी की सहयोगी राम विलास पासवान के नेतृत्व वाली लोक जन शक्ति पार्टी ने 6 और उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने 3 सीटें जीतीं थीं। इस चुनाव में जनता दल यूनाइटेड को महज 2 सीटें आईं थीं।

इस तरह से एनडीए ने बिहार में 2014 में 40 सीटों में से 31 सीटों पर कब्जा जमाया था। अब जब नीतीश कुमार एनडीए के साथ हैं तो उनपर अपनी पार्टी के सीटों का आंकड़ा बढ़ाने का दबाव है, साथ ही एनडीए को भी मैक्सिमस स्कोर तक ले जाने की चुनौती है।
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इस तरह अगर इस सर्वे को सच माना जाए तो राहुल गांधी अपनी ताकत में जबर्दस्त बढ़ोतरी करते दिख रहे हैं। यह भाजपा के लिए एक बड़ी चुनती है कि वे उभरते राहुल और कांग्रेस का सामना कैसा करते हैं।

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