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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में खेलो इंडिया की शुरुआत की है। कहने को तो यह कैम्पेन या कहें सरकारी योजना देश में खेल एवं खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू हुआ है। ऐसे में मोदी इस योजना के जरिये देश में खेल को करप्शन से मुक्त कर प्रतिभाओं के लिए मौके देने की बात कर रहे हैं।

लेकिन यह सब सुनने में भले ही बहुत अच्छा लग रहा हो लेकिन जिस तरह हर सरकारी योजना भ्रष्ट सिस्टम और लाल फ़ीता शाही की भेंट चढ़ जाता है क्या यह योजना भी इसी तरह करप्ट नहीं होगी, इसकी का गारंटी है।

आज क्रिकेट बोर्ड से लेकर हॉकी और फुटबॉल संघ भेदभाव और सियासत की भेंट चढ़ गए हैं तो फिर खेलो इंडिया कौन सी अलग योजना है।

वैसे पीएम मोदी ने खेलो इंडिया के उद्घाटन समारोह में कहा कि खेलों का युवाओं के जीवन में मुख्य स्थान होना चाहिए। खेलकूद व्यक्तित्व के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने कहा कि अपने व्यस्त कार्यक्रम से खेलों के लिए समय निकालें, खेलकूद को प्राथमिकता दें। मोदी ने कहा, ‘देश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हमारा युवा राष्ट्र है और हम खेल के क्षेत्र में और बेहतर कर सकते हैं।’

उनके मुताबिक ‘खेलो इंडिया’ का मतलब केवल पदक जीतना नहीं है। यह और अधिक खेलने के जन आंदोलन को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास है। हम उस हर आयाम पर ध्यान देना चाहते हैं जो देश को खेल के क्षेत्र में दुनिया में लोकप्रिय बनाए।

यह सब बातें भाषण की तर्ज पर सुनने के लिए ही ठीक हैं जब सच में यह योजना धरातल पर उतरेगी तो देखते हैं इनका क्या हश्र होगा।

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