महाश्वेता देवी की चर्चित कहानी डायन पर आधारित नाटक का मंचन करते कलाकार
Print Friendly, PDF & Email

हिंद वॉच ब्यूरो रिपोर्ट
भोपाल : शहर के शहीद भवन में इन दिनों रंग त्रिवेणी नाट्य उत्सव-4 का आयोजन किया जा रहा है। इस नाट्य उत्सव में अलग-अलग विषयों पर केन्द्रित नाटकों का मंचन किया जा रहा है। इसी क्रम में महाश्वेता देवी की चर्चित कहानी डायन पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। निजाम पटेल निर्देशित इस नाटक की प्रस्तुति माही थिएटर के कलाकारों ने दी। कहानी की शुरुआत झारखंड के गांव से होती है। यहां रेलवे के अफसर ट्रेन को हादसे से बचाने में मरने वाली चंडी के घर मिलने पहुंचते है। वे कहते है कि सरकार उन्हें इनाम देना चाहती है। यह सुनकर सारा गांव उससे रिश्तेदारी निकालने लगता है।

निजाम ने बताया कि लेखिका महाश्वेता देवी करीब 26 साल से डायन घोषित किए जाने की इस कुप्रथा के खिलाफ देशभर में आंदोलन चला रही हैं। जब यह कहानी मैंने पढ़ी तो बतौर रंगकर्मी इसका नाट्य रूपांतरण करने निश्चय किया। 

भारतीय समाज में स्त्री को डायन बताकर उसपर अत्याचार किए जाने की कुप्रथा आज भी प्रचलित है। आये-दिन अखबारों और टेलीविजन पर यह ख़बरें आतीं हैं कि किसी स्तरों डायन बताकर लोगों ने मारपीट की। अनेक मामले ऐसे होते हैं जिसमें डायन घोषित कर दी गयी महिला की बेकाबू भीड़ द्वारा ह्त्या कर दी जाती है। इस गंभीर विषय पर समाज को जितना संवेदनशील दिखना चाहिए, उतनी संवेदनशीलता नहीं दिखती है। ऐसे में भोपाल के शहीद भवन में महाश्वेता देवी की रचना डायन पर आधारित नाटक का मंचन कर जनमानस को जागरूक करने का काम किया गया है।

यह भी पढ़ें :  सिपाही की माँ (नाटक)- मोहन राकेश

इस नाट्य उत्सव में वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक चटर्जी को कला सिद्धी सम्मान से सम्मानित किया गया।

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓