(जनसंवाद केंद्र में आयोजित शिकायतों की समीक्षा करते मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल)
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रांची : मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सह सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव सुनील कुमार वर्णवाल ने कहा कि आउट सोर्सिंग के माध्यम से काम कराने के बाद भुगतान नहीं करने वाले एजेंसियों पर कार्रवाई करें। भुगतान में लापरवाही व विलंब करने वाले एजेंसियों को काम नहीं देने व श्रम कानून के तहत इनपर कार्रवाई करने पर भी विचार करना चाहिए।

काम के बाद भुगतान नहीं करने का मामला कोई साधारण मामला नहीं है। श्री वर्णवाल आज सूचना भवन में मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में दर्ज लंबित शिकायतों की समीक्षा कर रहे थेसूचना भवन में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों में लंबित शिकायतों की समीक्षा की गई। साथ ही 18 शिकायतों की विशेष समीक्षा की गई।

ऊर्जा विभाग, जामताड़ा के विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत लगभग 100 कर्मचारियों को सितंबर 2017 से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। इसी मामले की समीक्षा के दौरान श्री वर्णवाल ने ऊर्जा विभाग के नोडल अधिकारी से कहा कि ऐसी एजेंसी पर कार्रवाई करना चाहिए। इनसे काम नहीं लेने पर भी विचार करना चाहिए। उन्होने नोडल अधिकारी को निर्देश दिया कि किसी भी कीमत पर सभी कर्मचारियों का भुगतान सुनिश्चित कराएं।

पलामू के सीरम गाँव निवासी अनिल कुमार सिंह की हत्या वर्ष 2011 को हुई थी। हत्या के 7 साल बाद भी अब तक पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इस मामले में पूछे जाने पर गृह विभाग के नोडल अधिकारी ने बताया कि मामला सीआईडी के पास है। सीआईडी के नोडल अधिकारी से पूछे जाने पर उन्होने बताया कि अभी अनुसंधान चल रहा है। श्री वर्णवाल ने कहा कि कब तक अनुसंधान चलता रहेगा। उन्होने नोडल अधिकारी को निदेश दिया कि अविलंब अनुसंधान पूर्ण कर कार्रवाई करें। साथ ही मामले के अनुसंधानकर्ता को अनुसंधान में विलंब को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी करें। मामले में सीआईडी के एडीजी के साथ समीक्षा करने का निर्देश भी दिया गया।

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गिरिडीह के बिरनी प्रखण्ड में डबरसैनी मोड़ के समीप 4 वर्ष पूर्व सड़क निर्माण के दौरान बीच सड़क पर लगे बिजली के 25 खंभो को नहीं हटाया गया है। अब तक तीन दुर्घटना हो चुकी है और एक महिला की मौत भी हो चुकी है। विभागीय समन्वय नहीं होने के कारण समाधान नहीं हो पा रहा है। इस मामले में गिरिडीह के नोडल अधिकारी ने बताया कि पीडबल्यूडी के द्वारा ऊर्जा विभाग को राशि नहीं जमा किए जाने के कारण खंभों को नहीं हटाया जा सका है।

मुख्यमंत्री के सचिव ने स्पष्ट कहा कि सभी विसंगतियों को दूर कर एक सप्ताह के अंदर सभी खंभों को सड़क पर से हटाएँ। यदि एक सप्ताह के अंदर समस्या का निष्पादन नहीं होता है तो दोनों विभाग के कार्यपालक अभियंता निलंबित होंगे। मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष सीधी बात में रखा जाएगा।

देवघर के कमला कुमारी संस्कृत महाविद्यालय में पेयजल और शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। इसकी शिकायत 2017 में ही उपायुक्त से की गई बावजूद इसके अब तक न तो शौचालय बना और न ही पेयजल की सुविधा मिली। इस संबंध में देवघर के नोडल अधिकारी ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए विश्वविद्यालय को पत्राचार किया गया है। इस पर श्री वर्णवाल ने कहा कि जब उपायुक्त को अनाबद्ध राशि दी गई है तो फिर हर मामले में पत्राचार की क्या आवश्यकता है? उन्होने एक सप्ताह के अंदर इस समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया।

पूर्वी सिंहभूम के रघुनाथ देवगम ने पीएमईजीपी के तहत ऋण के लिए जिला उद्योग केंद्र में आवेदन दिया था। जिला उद्योग केंद्र ने इनके आवेदन को अनुमोदित करते हुये बैंक ऑफ इंडिया को भेज दिया। 6 माह से इनका आवेदन बैंक के पास लंबित पड़ा था। श्री वर्णवाल ने नोडल अधिकारी से पूछा तो बताया गया कि इनका आवेदन रद्द कर दिया गया है। श्री वर्णवाल ने कहा कि 6 माह तक आवेदन उनके पास लंबित था, जब शिकायत आई तो इनके आवेदन को ही रद्द कर दिया गया। उन्होंने इस बात का निर्देश दिया कि इतने लंबे समय तक आवेदन लंबित करने के बाद उसे रद्द करने वाले बैंक मैनेजर पर कार्रवाई करें। इसके लिए बैंक के वरीय अधिकारी से बात करें।

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गुमला के जरजट्टा ग्राम में स्वच्छ भारत अभियान के तहत 30 ग्रामीणों ने शौचालय बनवाया। इसका उपयोगिता प्रमाणपत्र भी जल सहिया के माध्यम से प्रखण्ड कार्यालय में जमा करा दिया गया है। अब इन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस बाबत पूछे जाने पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि जल सहिया से रिपोर्ट मांगा गया है। पूरा मामला देखने के बाद ही कार्रवाई या भुगतान किया जा सकता है। इस पर सचिव ने कहा कि अविलंब मामले की जांच करते हुये कार्रवाई कार्रवाई करें। आप खुद जाकर स्थल जांच करें।

रामगढ़ के गोविंद बड़ाइक माडा योजना के तहत वन विभाग ने 2012 से 2015 तक कार्यरत थे। इन्हें 2013 से 2015 तक के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। इस बाबत इन्होंने कई बार आवेदन दिया पर अब तक भुगतान नहीं किया गया है। अपनी रिपोर्ट में डीएफ़ओ, रामगढ़ ने भी गोविंद के काम किए जाने की पुष्टि की है, बावजूद इसके अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। यह मामला 30 जनवरी 2018 को सीधी बात में मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया था। तब रामगढ़ के उपायुक्त को मुख्यमंत्री ने अविलंब भुगतान का निर्देश दिया था। अब तक भुगतान नहीं हो पाया है। श्री वर्णवाल ने कहा कि मामले को अविलंब सुलझाते हुये भुगतान कराएं। सीधी बात के दौरान मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी उसका अनुपालन नहीं करने वाले उपायुक्तों को भी जवाब देना होगा।

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