Print Friendly, PDF & Email



रांची : हिंद वॉच मीडिया ने ग्रास रूट संवाददाताओं के लिए “जमीनी पत्रकारिता की चुनौतियां” विषय पर गत 7 जून को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन रांची में किया। कार्यशाला में हिंद वॉच झारखण्ड से जुड़े रांची, बोकारो, जमशेदपुर और देवघर जिले के संवाददाताओं ने भाग लिया। हिंद वॉच झारखण्ड के सह-संपादक कुमार कौशलेन्द्र ने बताया कि “छोटे-छोटे समूह में हिंद वॉच अपने जमीनी संवाददाताओं के लिए लगातार कार्यशालाओं का आयोजन करेगा। आज की कार्यशाला उसी कड़ी में आयोजित पहली कार्यशाला है।” कार्यशाला में हिंद वॉच मीडिया समूह के प्रधान संपादक सुशील स्वतंत्र, शिक्षाविद, लेखक-कवि और फिल्मकार विनोद कुमार, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक संजीव शेखर, हिंद वॉच झारखण्ड के सह-संपादक कुमार कौशलेन्द्र और सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत कुमार उपस्थित थे।

(कार्यशाला में उपस्थित हिंद वॉच मीडिया समूह के प्रधान संपादक सुशील स्वतंत्र, शिक्षाविद, लेखक-कवि और फिल्मकार विनोद कुमार, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक संजीव शेखर)

कार्यशाला की शुरुआत हिंद वॉच मीडिया समूह के प्रधान संपादक सुशील स्वतंत्र के स्वागत उद्बोधन के साथ हुई। उन्होंने कहा कि “आज के समय में पत्रकारिता में वास्तविक और जमीनी ख़बरों को जगह दे पाना सबसे बड़ी चुनौती हो गयी है। मीडिया से जमीनी रिपोर्ट धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं और डेस्क पर बैठकर बनाई गई खबरें परोसी जा रही हैं। आज के पेड़ न्यूज़ और फेक न्यूज़ के दौर में ग्रास रूट जर्नलिज्म ही एक रास्ता है, मीडिया की विश्वसनीयता को बचाए रखने का।

(प्रतिभागियों को संबोधित करते प्रोफेसर विनोद कुमार)

लेखक-कवि और फिल्मकार प्रोफ़ेसर विनोद कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि “एक सच्चे पत्रकार को निर्भीक होना बहुत जरूरी है। उसके अन्दर खबरों की प्राथमिकता तय करने का हुनर भी होना चाहिए। भूख से हुई मौत की ख़बर को आज की कोर्पोरेट मीडिया शायद तबज्जो न दे लेकिन सच्ची जमीनी पत्रकारिता का अर्थ यही है कि जमीनी खबरों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाए।” उन्होंने प्रतिभागियों से सवाल करते हुए कहा कि “एक सच्चे पत्रकार में सुदूर जंगल और दुर्गम इलाकों की दबती हुई ख़बरों को कवर करने की चुनौती उठाने का दम होना चाहिए। “क्या आप जमीनी पत्रकारिता के खतरों को उठाने के लिए तैयार हैं? अगर हाँ, तो आपमें एक सच्चे ग्रास रूट जर्नलिस्ट बनने की पूरी संभावना है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार और लेखक संजीव शेखर ने जीवन में लम्बे समय तक अर्जित पत्रकारिता के अनुभवों को साझा करते हुए प्रतिभागीओं से बातचीत किया। देश के अनेक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके संजीव ने कहा कि “खबरों की प्रमाणिकता को जांचे बिना किसी भी पत्रकार को कोई

(युवा संवाददाताओं के साथ पत्रकारिता के अनुभव साझा करते वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक संजीव शेखर)

ख़बर नहीं लिखना चाहिए। किसी घटना को ख़बर में तब्दील करना एक जिम्मेवारी का काम है और सभी पक्षों के बयान लिए बिना किसी ख़बर को आगे भेजना गैर-जिम्मेदाराना कदम साहित हो सकता है।” उन्होंने प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में अपने लम्बे अनुभव को प्रतिभागियों के साथ साझा किया, जिसे कार्यशाला में शामिल संवाददाताओं ने बहुत रूचि के साथ समझा और सराहा।

यह भी पढ़ें :  कंडीशन अप्लाई के साथ मिली सलमान खान को जेल से बेल

दोपहर के भोजन के उपरांत हिंद वॉच झारखण्ड के सह-संपादक कुमार कौशलेन्द्र और समूह के प्रधान संपादक सुशील स्वतंत्र ने विस्तार से जमीनी पत्रकारिता की चुनौतियों पर प्रतिभागियों से चर्चा किया। कार्यशाला में शामिल संवाददाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यशाला का संचालन इस तरह से किया गया था कि सभी प्रतिभागी एक अनौपचारिक माहौल में विषय पर विस्तृत चर्चा कर सकें। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। सुबह 10 बजे आरम्भ हुए कार्यशाला का शाम 6 बजे समापन हुआ।

कार्यशाला में शामिल हिंद वॉच झारखण्ड के जमीनी संवाददाता (ग्रास रूट रिपोर्टर्स)
इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓