Print Friendly, PDF & Email

हाथरस, उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय कवि संगम की एक बृहद काव्यगोष्ठी का आयोजन हाथरस जंक्शन के कैलोरा चैराहे स्थित कवि चाँद हुसैन चाँद के आवास पर किया गया। जिसकी अध्यक्षता अलीगढ़ से आए कवि नरेन्द्र शर्मा ‘नरेन्द्र’ ने की। तथा संचालन देवेश सिसोदिया ‘आंसू’ ने किया। गोष्ठी का शुभारम्भ बरिष्ठ कवि भोजरात भोज की सरस्वती वन्दना से हुआ। गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अलीगढ़ से पधारे सुभाष सिंह तौमर तथा विशिष्ट अतिथि मनोज नागर का फूल माला पहना कर स्वागत किया गया। सुभाष सिंह तौमर ने पढ़ा कि- नील गगन में उडते पंछी उन्मुक्त विचरते हैं, हम हैं श्रेष्ठ इंसान पिंजरों में रहते हैं। मनोज कुमार नागर ने पढ़ा कि- वह पल तुमको पड़पायेंगे, तब हम याद बहुत आयेंगे।

हानिफ सन्दली ने पढ़ा कि- मस्जिद की बात कर न शिवालों की बात कर, बेनूर घरों में तू उजालों की बात कर। बरिष्ठ कवि ओमप्रकाश एडवोकेट ने पढ़ा कि यहाँ सब गूंगे बहरे हैं, इलाजों पर भी पहरे हैं। वरिष्ठ कवि भोजराज भोज ने पढ़ा कि रामजी के वाणों की हुंकार अब नहीं, अर्जुन के गाण्डीव की टंकार अब नहीं। युवा कवि मुनी सिसोदिया ने पढ़ा कि- सारे दल चला रहे हैं वोटो की राजनीति साफ स्वच्छ नीतियों का दिखता न पाथ है, किसपे भरोसा करें किसे माने देशभक्त, एक सांपनाथ है तो एक नागनाथ हैं।

राष्ट्रीय कवि संगम के जिला सह संयोजक देवेश सिसोदिया आंसू ने पढ़ा कि कब तक भरेंगे पेट अपना ईमान बेचकर, कैसे जिन्दा रहेंगे हरवक्त सम्मान बेचकर। गोष्ठी के आयोजक चांद हुसैन चांद ने पढ़ा कि जन जन की तमन्ना है तेरा दीदार हो जाये, मेरे देश में फिर से तेरा अवतार हो जाये। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे बरिष्ठ साहित्यकार नरेन्द्र शर्मा नरेन्द्र ने पढ़ा कि- महक रहा है यह देश राष्ट्र भावना से, नारों से प्रदूषित चमन मत कीजिये। काव्यगोष्ठी में काव्यपाठ करने में मुख्य रूप से बाबा देवी सिंह निडर, रामजी लाल शिक्षक, अजीत प्रताप सिंह, मु. इरफान रजा, उजाला सर, गनपति गणेश, देवेश दीक्षित, अनूप ठाकुर आदि लोग मौजूद थे।

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓