(झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलाफ गोलबंद होता विपक्ष)
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झारखंड : देश भर में अलग-अलग मुद्दों पर विपक्ष लामबंद हो रहा है। झारखण्ड में इसकी वजह बनी है झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, जिसके खिलाफ विपक्ष गोलबंद हो गया है। आगामी 5 जुलाई को संगठित रूप से विपक्ष ने झारखण्ड बंद का कॉल दिया है। विपक्ष ने संशोधन बिल के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। 28 जून को विपक्ष का राजभवन मार्च का भी कार्यक्रम है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी। सोमवार (18 जून) को यह बैठक हेमंत सोरेन के आवास पर हुई।

हेमंत ने बताया कि चार जुलाई की रात 12 बजे से पांच जुलाई की रात 12 बजे तक बंद प्रभावी रहेगा। बंदी से आपातकालीन सेवाओं को मुक्त रखा जायेगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आंदोलन में साथ आने की अपील की है। हेमंत ने कहा कि विधेयक को लेकर प्रदेश में ऐसा जनाक्रोश पैदा हुआ है कि भाजपाई राज्य में घूमने लायक नहीं रह जाएंगे। सरकार जमीन लूट में शामिल अधिकारियों को बचाने के लिए राजस्व संरक्षण अधिनियम भी लाने जा रही है। इस कानून के पारित होने के बाद जमीन की हेराफेरी करने वाले अधिकारियों पर अदालत में मुकदमा तक नहीं होगा।

आंदोलन के संचालन के लिए बनेगी समन्वय समिति
बैठक में विधेयक के खिलाफ संयुक्त आंदोलन के संचालन के लिए समन्वय समिति बनाने का फैसला लिया गया। इसके सदस्यों के चयन की जिम्मेवारी हेमंत सोरेन पर छोड़ी गयी। बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार,फुरकान अंसारी, झाविमो के योगेंद्र प्रताप सिंह, राजद के जनार्दन पासवान और संजय सिंह यादव आदि मौजूद थे।


यह बिल आदिवासियों-मूल वासियों की भावनाओं के विपरित है
विधेयक के विरोध में सोमवार (18 जून) को प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के नेतृत्व में पार्ट कांग्रेसी नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि “यह बिल आदिवासियों-मूल वासियों की भावनाओं के विपरित है।”
डॉ. अजय कुमार
प्रदेश अध्यक्ष, झारखण्ड कांग्रेस


जनता विपक्ष के बहकावे में आने वाली नहीं है
“जनता ने सोमवार को जमीन अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलाफ बुलाए गए बंदी को नकार दिया। बंद सुपर फ्लॉप रहा। इससे यह स्पष्ट हो गया है की जनता विपक्ष के बहकावे में नहीं आने वाली है। प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण के संशोधन में निजी क्षेत्र को जमीन देने की दूर-दूर तक कोई बात नहीं है।यह सिर्फ विशुद्ध रूप से सरकारी योजनाओं के लिए लागू होगा और उसमें भी ग्राम सभा से परामर्श लेना होगा। नए संशोधन से भूमि अधिग्रहण 6 महीने से भी कम समय में हो जाएगा जिससे सरकार की विकास योजनाओं में तेजी आएगी और भूस्वामियों को भी समय पर मुआवजा मिल सकेगा। अभी भी भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत भूमि अधिग्रहण होता है लेकिन उसमें काफी लंबा समय लगता है और भूस्वामियों को भी मुआवजे की राशि मिलने में वर्षों लग जाता है।”
प्रतुल शाहदेव
झारखण्ड प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा


गरीबों की जमीन अमीरों को मिल जाएगी
“भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल 2017 को मंजूरी दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे ग्रामीण, किसानों और आदिवासियों की जमीन सरकार बिना रोक-टोक के अधिग्रहित कर पूंजीपतियों को देगी। इससे लोग भूमिहीन हो जाएंगे और राज्य में पलायन की समस्या बढ़ेगी। 2019 में हमलोगों की सरकार बनने पर पहली कैबिनेट की बैठक में इस कानून को लागू होने की तिथि से रद्द कर दिया जाएगा। बिना ग्राम सभा की अनुमति एवं सोशल इंपैक्ट का ध्यान रखे एक इंच भी जमीन नहीं ली जाएगी।”
बाबूलाल मरांडी
पूर्व मुख्यमंत्री व झाविमो प्रमुख


इस संशोधन की पुनर्समीक्षा करे झारखण्ड सरकार 
“राज्य सरकार तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाए और इस बिल की पुनर्समीक्षा करे। आजसू पार्टी का इस संशोधन विधेयक को लेकर पहले और आज भी कड़ा विरोध है। झारखंड सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति में संशोधन, झारखंड की जनभावनाओं के विपरीत उठाया गया कदम है। आजसू पार्टी चाहती है कि सरकार इस विषय पर सर्वदलीय एवं सामाजिक संगठनों के साथ बैठक कर इस संशोधन की पुनर्समीक्षा करे क्यूंकि इस संशोधन का झारखंड में दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। इस नीति से कृषि योग्य भूमि में कमी आएगी और कृषि भूमि के गैर कृषि उपयोग के लिए हस्तांतरण में तेजी आएगी।”
डॉ. देवशरण भगत
मुख्य केंद्रीय प्रवक्ता, आजसू पार्टी


सरकार का जनविरोधी चेहरा सामने आया
“सरकार का जन विरोधी चेहरा सामने आ गया है। उसकी नजर मेहनतकश अवाम की जमीन पर है। सरकार आदिवासियों एवं मूलवासियों की जमीन छीनना चाहती है। इस बिल के लागू होने से कृषि योग्य भूमि का हस्तांतरण तेजी से उद्योग के लिए होने लगेगा। इससे बहु-फसली जमीन बर्बाद हो जाएगी। इससे किसान भुखमरी और गरीबी के शिकार होने लगेंगे। कांग्रेस ऐसी तमाम कोशिशों का पुरजोर विरोध करेगी। जब मुख्यमंत्री रघुवर दास सीएनटी, एसपीटी एक्ट में संशोधन नहीं करा पाए, तो उन्होंने जनता की आंखों में धूल झोंककर अंबानी-अडानी समेत अन्य कॉरपोरेट घरानों को सस्ती दर पर जमीन देने के लिए दूसरा तरीका अपनाया। गोड्डा में जमीन किस प्रकार अडानी को सरकार देना चाहती है, वह किसी से छुपी नहीं है। कांग्रेस गोड्डा में अडानी के लिए हो रही जमीन लूट का जमकर विरोध करेगी।”
राजेश ठाकुर
मीडिया प्रभारी, झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस

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