Print Friendly, PDF & Email



अचानक सुर्खियाँ बटोरने वाली हरियाणा की बेटी के नाम एक लेखिका का खुला-पत्र आजकल सोशल मीडिया में खूब चर्चा में है| विश्व सुंदरी बनीं मानुषी छिल्लर को लेखिका मृदुला शुक्ला ने एक खुला-पत्र लिखकर कहा है कि अपनी बुद्धिमत्ता परीक्षा में आपने जिस आखिरी सवाल का चतुराई से जवाब देकर ताज अपने नाम कर लिया है, असल में उस जवाब ने हर उस स्त्री को कमतर कर दिया जो किसी वजह से माँ नहीं बन सकती अथवा माँ नहीं बनना चाहती| आईये पढ़ते हैं विश्व सुन्दरी के नाम एक लेखिका का खुला-पत्र …

प्रिय मानसी छिल्लर,
विश्व सुन्दरी का ताज मुबारक |

गर मैं आपके आखिरी जवाब से इत्तेफाक नहीं रखती हूँ| आपने आखिरी सवाल को होशियारी से घुमा कर जवाब को भावुक मोड़ दे दिया आप ताज भी जीत गयी| इस तरह आपने हर उस स्त्री को कमतर कर दिया जो किसी वजह से माँ नहीं बन सकती अथवा माँ नहीं बनना चाहती चाहे वह अपने व्यावसायिक अथवा निजी जीवन में कितनी भी सफल क्यों न हो| माँ बनना न तो कोई व्यवसाय है न ही नौकरी न ही इसकी कोई कीमत हो सकती है| रही बात आदर की तो माँ को पहले ही बहुत आदर और प्यार मिलता रहा है| हर धर्म संस्कृति और समाज में माँ को जितना आदर और प्रेम मिलता है इससे ज्यादा की जरूरत मुझे महसूस नहीं होती|

पहले ही मातृत्व को इतना महिमामंडित किया जाता रहा है स्त्रियाँ अपने कैरियर, नौकरी,व्यवसाय ,उच्च शिक्षा को छोड़ माँ बनने को प्राथमिकता देती रही हैं और जो स्त्रियाँ किसी वजह से मातृत्व को प्राथमिकता न दे करके अपने काम को निष्ठापूर्वक करती रही हैं समाज उनमे निरंतर एक अपराधबोध भरता रहता है यह उनके काम को हतोत्साहित ही नहीं करता बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्य पर भी असर डालता है| कुछ स्त्रियाँ मातृत्व और काम के बीच संतुलन साधती सुपर वुमेन बनने लग जाती हैं, जो व्यवहार में संभव नहीं है| कई बार ऐसे संतुलन साधती स्त्रियाँ कामकाज छोड़ बच्चे संभालने को महान काम समझ घर में बैठ जाती हैं|

माँ बनने से लेकर बच्चे की जिम्मेदारी उठाती औरते अपने जीवन में आर्थिक रूप से कमजोर होती गयी अर्थतन्त्र पर काबिज व्यक्ति खुद को व्यवस्था में श्रेष्ठ बनाता चला गया |

माँ बनना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पिता होना ,मातृत्व और पितृत्व बराबर महत्वपूर्ण होने चाहिए| पिता से यहाँ अर्थ, पालन पोषण में बराबर भाग लेने वाला व्यक्ति होना चाहिए| वो जो रातों को जागकर बच्चे की नैप्पी बदले अगर रात को जग नहीं सकता तो रात में जगी माँ को सुबह देर तक सोने देकर अपना और उसका टिफिन तैयार कर ऑफिस जाने के वक्त दोनों साथ ऑफिस जाए बच्चे के बीमार होने पर छुट्टियाँ लेकर घर में रुके| कितना अच्छा होता अगर आप कहतीं बच्चे के पालन पोषण में बराबरी से जिम्मेदार पिता कोऔर माँ को बराबर सम्मान और आदर मिलना चाहिए|

स्त्री की जैविक संरचना के कारण गर्भधारण करना उसके ही हिस्से आया और फिर बच्चे के जन्म के बाद उसे थोड़े दिन सहायता की जरूरत होती है ये सच है लेकिन उसके साथ यह भी सच है मातृत्व को महिमामंडित करते करते स्त्री को महान बनाते बनाते घर के खूंटे में बांध कर गृहस्थी में जोत दिया गया|

मिस छिल्लर आपसे उम्मीद थी आप विश्व मंच से स्त्रियों के हर क्षेत्र में किये जा रहे कामो के बारे में बात करती| वैसे यह सवाल स्त्री पर आधारित भी नहीं था इस सवाल के जवाब के लिए पूरी दुनिया के आर्थिक सामजिक संरचना की गहरी समझ आवश्यक है| कौन सा काम महत्वपूर्ण है किस काम के लिए सबसे ज्यादा पैसे दिए जाने चाहिए?कौन सा ऐसा काम है जो इस ग्लोब के हित में है?

पर्यावरण संरक्षण से लेकर मनुष्य के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य आदि अनेक ऐसे काम हैं जिस के लिए जितना पैसा दिया जाए कम है|

रही बात बच्चों के देखभाल की तब तो आँगन बाड़ी नर्सरी के शिक्षकों को सबसे ज्यादा आदर मान और पैसा दिया जाना चाहिए| ये वह लोग हैं जो अपने नहीं बल्कि दूसरों के अबोध बच्चो की देखभाल करने का दुष्कर काम करते हैं|यदि इन्हें सबसे ज्यादा वेतन दिया है और ये गहन प्रशिक्षण के बाद इस व्यवसाय में आते हैं तब प्रतिभाशाली लोग इस काम में आयेंगे| सम्मान मिलने पर उच्च मानवीय मूल्य के लोग जुड़ेंगे इस तरह इस ग्लोब के सारे बच्चे शानदार तरीके से विकसित होंगे और इस ग्लोब का भविष्य सुरक्षित होगा|

खैर…. मुझे विघ्न संतोषी मत समझिएगा आपकी जीत पर वाकई खुश हूँ बस एक आखिरी बात से सहमत नहीं हूँ | माँ होने के साथ एक स्त्री और शिक्षिका भी हूँ न |
आपके लिए प्रेम और सुंदर भविष्य के लिए मंगलकामना,

मृदुला शुक्ला

 

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓
loading...