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देश भर में नीट के एग्जाम हो रहे हैं और नक़ल रोकने के लिए पिछली बार की तरह कई तरह ही इस बार भी काफी सख्ती अपनाई गयी है। जाहिर है इस से छात्रों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

आलम यह है कि प्रवेश से पहले ही बुरका उतरवाया जा रहा है तो कहीं दुपट्टा भी जमा किये गए। इतना ही नहीं सभी को जूते और चप्पल भी उतारकर एग्ज़ाम देना पड़ा।

गौरतलब है कि पिछली बार हिजाब पर रोक लगाने के चलते काफी आलोचना हुई थी इसके बावजूद बोर्ड इस बार भी नक़ल के खिलाफ सख्ती से पेश आ रहा है। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए सेंट्रल बोर्ड फॉर सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) का नैशनल एंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट (NEET) रविवार को हो रहा है।

बता दें कि इस साल 66,000 सीटों के लिए करीब 13,36,000 छात्र प्री-मेडिकल ओर डेंटल परीक्षा में बैठे हैं। नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए केंद्रों पर छात्रों के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। परीक्षा केंद्र के अंदर छात्रों को पेन ले जाने की भी इजाजत नहीं है। हालांकि, इस कारण छात्रों को काफी परेशानी का सामना भी करना पड़ रही है।

हर बार की तरह परीक्षा केंद्रों में नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। यहां तक कि छात्राओं को दुपट्टा तक ले जाने की अनुमति नहीं है। किसी भी तरह के धागे को एंट्रेंस पर ही काटा जा रहा है। लोगों को चप्पल-सैंडल पहनकर ही अंदर जाने की अनुमति है। जूते पहनकर आए छात्रों को नंगे पैर अंदर जाना पड़ रहा है।

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छात्रों से हल्के रंग के प्लेन, बिना प्रिंट वाले कपड़े पहनने के लिए कहा गया है। इसके अलावा केंद्र के अंदर मेटल, जूलरी, खाने-पीने का सामान ले जाने के अनुमति नहीं है। लड़कियों से उनके बाल भी बंधवाए जा रहे हैं।

चेन्नी के गोपालपुरम स्थित डीएवी में एक छात्रा से उसका हिजाब भी उतरवा लिया गया, जिसके चलते कई लोगों ने नाराजगी जताई है। गौरतलब है कि पिछले साल ड्रेस कोड को लेकर CBSE की काफी आलोचना हुई थी जिसके चलते इस बार बोर्ड ने पहले ही कह दिया था कि जो छात्र अपने पारंपरिक परिधान में परीक्षा देने आना चाहते हैं, उन्हें परीक्षा से एक घंटे पहले केंद्र पर पहुंचना होगा।

उधर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलनिसामी ने कहा कि दूसरे राज्यों में परीक्षा देने जा रहे छात्रों को 1000 रुपये की सहायता और एक अन्य व्यक्ति के साथ जाने के लिए सेकंड क्लास का ट्रेन टिकट दिया जाएगा। इसके अलावा एआईएडीएमके से निकलकर अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम पार्टी बनाने वाले टीटीवी दिनकरन ने भी छात्रों को दूसरे राज्यों में परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और वहां रुकने में सहायता देने का वादा किया था।

कुल मिलाकर रविवार के दिन छात्रों को तमाम सख्तियों से गुजरकर पेपर देने पड़े। हालांकि नक़ल रोकने के लिए यह सब जरूरी है।

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