अनुमंडलीय अस्पताल बुंडू के प्रभारी डॉक्टर अरुण कुमार पासवान (तस्वीर : हिंद वॉच)
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ग्रास रुट रिपोर्टर किशन कुमार दत्ता की रिपोर्ट

बुंडू : खसरा-रुबेला की रोकथाम के लिए 26 जून से एमएमआर अभियान शुरू किया जा रहा है। यह जानकारी अनुमंडलीय अस्पताल बुंडू के प्रभारी डॉक्टर अरुण कुमार पासवान ने दिया। उन्होंने बताया कि यह अभियान सिर्फ बच्चों के लिए नहीं है, गर्भवती महिलाएं भी इसकी चपेट में आ सकती है। इसकी चपेट में आने से उनके बच्चे अपंग पैदा लेते हैं। नौ माह से पंद्रह साल के बीच तक के बच्चे को खसरा और रूबेला का वैक्सीन दिया जाएगा।

नौ माह से पांच साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र एवं पांच साल लेकर पंद्रह साल के बीच तक के बच्चों को सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में वैक्सीन दिया जाएगा। अनुमंडल अंतर्गत कूल 147 स्कूल हैं जिसमें से 35 प्राइवेट स्कूल, 100 सरकारी, 8 हाई स्कूल एवं 4 सरकारी आवासीय स्कूल चिन्हित किये गए है। 147 स्कूलों में कार्यक्रम चलाया जायेगा। प्राइवेट स्कूल, सरकारी स्कूल,  आवासीय स्कूल एवं हाई स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 23725 है।

अनुमंडलीय अस्पताल बुंडू (तस्वीर : हिंद वॉच)

बुंडू अनुमंडल अंतर्गत कुल 110 आंगनबाड़ी केंद्र है, जिसमें बच्चों की संख्या 6156 है। स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों को मिलाकर कुल 29881 बच्चों को टीका लगाया जाएगा। ये अभियान 26 जून से शुरू होगी और पूरे चार सप्ताह तक  चलेगा। जिसमें  प्रत्येक दिन 150 से 200 बच्चों को टीका लगाया जायेगा। इसके लिए अलग-अलग स्थानों में के लिए 16 टीम बनायी गयी है। 197 सहिया हैं जो इस अभियान में साथ देंगी, इन सहियाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब सिर्फ स्कूल में बैठक कर इसका प्रशिक्षण देना बाकी है।

अनुमंडलीय अस्पताल बुंडू प्रभारी डॉक्टर अरुण कुमार पासवान ने इस अभियान के बारे जानकारी देते हुए कहा कि खसरा और रूबेला का सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं के लिए होता है। गर्भवती अगर इसकी चपेट में आ गईं तो जन्म लेने वाले बच्चे कई बिमारियों से ग्रस्त होने के साथ साथ अपंगता का भी खतरा बना रहता है। खसरा और रूबेला जैसी बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए इस अभियान जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह टीका घर-घर जाकर नहीं दिया जाएगा। टीकाकरण का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

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