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जिस मदर टेरेसा के नाम पर भारत ही नहीं पूरी दुनिया को अपार भरोसा है, उनकी संस्था में अगर बच्चों की कीमत पचास हजार से एक लाख बीस हजार रुपये तक तय कर दी जाती है, तो इसे सिर्फ मदर के सपनों के साथ धोखा नहीं कह सकते, बल्कि यह मानवता को शर्मसार कर देने वाला अक्षम्य कुकृत्य है।

 

पिछले दिनों यह खबर सुर्ख़ियों में रही कि मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी के रांची स्थित अनाथालय से बच्चों की बिक्री चल रही है। अपने आप में यह एक चौकाने वाली ख़बर थी क्यूंकि मदर टेरेसा और उनकी संस्था पर आजतक लोगों को गहरा विश्वास था। मिशनरीज ऑफ चैरिटी को मानवता के क्षेत्र में कार्य करने वाली अग्रणी संस्थाओं में एक समझा जाता रहा है। संस्था की स्थापना बेसहारा और अनाथ बच्चों को बेहतर जीवन प्रदान करने के लिए किया गया था।

इस चिल्ड्रेन होम से में जन्में या इससे जुड़े 280 नवजात बच्चों का आज कोई अता-पता नहीं है। एक नवजात की बिक्री का खुलासा होने के बाद इस चिल्ड्रेन होम से जुड़े नित नये खुलासे हो रहे हैं।

 

ईसाई धर्म में संत का ओहदा बहुत महत्त्व रखता है। एक लम्बी प्रक्रिया के बाद ही किसी को संत की उपाधि मिलती है। मदर टेरेसा को अपने जीवन में अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए अभूतपूर्व काम करने के लिए नोबेल पुरस्कार भी मिला और ईसाई धर्म में श्रेष्ठतम माना जानी वाली संत की उपाधि भी। यह कौन जानता था कि जिन उच्च मानवीय आदर्शों को मदर गढ़ रहीं हैं, एक दिन उनका अनुसरण करने वाले ही उसे मिट्टी में मिला देंगें?

अनाथालय से अबोध बच्चों को बेचना कानून की नज़र में तो घोर अपराध है ही, मदर के गढ़े आदर्शों के साथ भी धोखा है। यही धोखा मिशनरीज ऑफ चैरिटी की जेल रोड़ रांची शाखा की संचालिका मदर टेरेसा को दे रहीं हैं। उनकी इस कुकृत्य का ही परिणाम है कि यह चिल्ड्रेन होम आज बच्चों की बिक्री के बड़े केंद्र के नाम से जाना जाने लगा है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि सरकारी एजेंसियों की मिली-भगत के बगैर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को किसी एक सेंटर से बेचा जाना संभव नहीं है।समाज कल्याण विभाग आखिर किसी अनाथालय को ऐसे अनियंत्रित कैसे छोड़ सकता है, सरकार को इस सवाल का जवाब तो देना ही होगा? 

 

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इस चिल्ड्रेन होम से में जन्में या इससे जुड़े 280 नवजात बच्चों का आज कोई अता-पता नहीं है। एक नवजात की बिक्री का खुलासा होने के बाद इस चिल्ड्रेन होम से जुड़े नित नये खुलासे हो रहे हैं। वर्ष 2015 से 2018 के बीच यहां करीब 450 गर्भवती महिलाएं थीं। इनमें से सिर्फ 170 की डिलीवरी रिपोर्ट ही उपलब्ध है। 280 के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस चिल्ड्रेन होम की संचालिका सिस्टर कोनसीलिया बाखला पर आरोप है कि नवजात बच्चों की बिक्री उनकी सहमति से किया जा रहा है। इस मामले में खुफिया विभाग पहले भी सरकार को रिपोर्ट देता रहा है। जनवरी, 2016 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की निर्मल हृदय रांची में 108 गर्भवती महिलाएं थीं। बाद में बाल कल्याण समिति ने जांच में पाया कि इनमें से 10 बच्चों का ही जन्म दिखाया गया। 98 के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी। जिला प्रशासन की जांच में अब यह बात सामने आयी है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी संस्था में वर्ष 2017 में कुल 26 बच्चों का जन्म हुआ था। इनमें से दो की मौत हो गयी, जबकि 24 बच्चे ट्रेसलेस हैं। इसके बारे में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को भी कोई जानकारी नहीं है, जबकि आरोपों से घिरी संस्था के जवाबदेह पदाधिकारी भी मुंह नहीं खोल रहे हैं। इन 24 बच्चों के संबंध में संस्था के रजिस्टर में भी किसी तरह की जानकारी दर्ज नहीं है। ऐसे में संस्था के साथ-साथ सीडब्ल्यूसी भी घेरे में है।

आंध्रप्रदेश में भी ऐसा मामला सामने आया था। बहुत-सी संस्थाओं के माध्यम से बच्चों की बिक्री हुई थी। आंध्रप्रदेश सरकार ने इस मामले में सीबीआइ जांच की अनुशंसा की थी।

जिस मदर टेरेसा के नाम पर भारत ही नहीं पूरी दुनिया को अपार भरोसा है, उनकी संस्था में अगर बच्चों की कीमत पचास हजार से एक लाख बीस हजार रुपये तक तय कर दी जाती है, तो इसे सिर्फ मदर के सपनों के साथ धोखा नहीं कह सकते, बल्कि यह मानवता को शर्मसार कर देने वाला अक्षम्य कुकृत्य है।

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इसमें कोई संदेह नहीं है कि सरकारी एजेंसियों की मिली-भगत के बगैर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को किसी एक सेंटर से बेचा जाना संभव नहीं है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के क्रिया-कलाप भी इस मामले में संदिग्ध नजर आते हैं। समाज कल्याण विभाग आखिर किसी अनाथालय को ऐसे अनियंत्रित कैसे छोड़ सकता है, सरकार को इस सवाल का जवाब तो देना ही होगा? वहीं दूसरी ओर मिशनरीज ऑफ चैरिटी भी अपने दोषी केंद्र संचालिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ कोई कार्यवाही न करके पूरे मामले की लीपापोती में जुट गयी है, जिससे संस्था की छवि और धूमिल हो रही है।

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