प्रतीकत्मक चित्र
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रांची, झारखंड
भाकपा माओवादी के महासचिव मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति के इस्तीफे के बाद श्रीकाकाकुलम के नंबाला केशव राव उर्फ बासव राव को संगठन का प्रमुख बनाया गया है। लक्ष्मण राव(75 वर्ष) की उम्र में बीमारी से ग्रस्त होने के बाद अपना पद छोड़ दिया है। खुफिया सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। बताया जा रहा है कि देश के 17 सेंट्रल कमेटी सदस्यों ने नंबाला को अपना मुखिया बनाया है।

एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक सीपीआइ माओवादी ने अपनी सेंट्रल कमेटी में छह नये चेहरे को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। समिति के सदस्यों की गिरफ्तारी और कई के समर्पण करने के बाद सन 2010 में सदस्यों की संख्या 39 से घट कर 15 हो गयी थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सन 2007 में हुई यूनिटी कांग्रेस में पीपुल्स वार ग्रुप की सीपीआइ माओवादी में विलय की घोषणा के बाद सन 2012 में कांग्रेस हुई। उसके बाद से नहीं हुई है।

नंबाला केशवा राव सेंट्रल मिलिट्री कमिशन (सीएमसी) का प्रमुख रहा है। उसे क्षेत्र में युद्ध की कला, विस्फोटक के प्रयोग की तकनीकी जानकारी व सैनिक कलाबाजी का पूरा ज्ञान है। वह पिछले 28 साल से भूमिगत है और पुलिस की पकड़ से बाहर है। गणपति के स्थान पर माओवादियों का नेतृत्व करने वाला नंबाला केशवा राव उर्फ बसवराजू मूल रूप से आंध्र प्रदेश स्थित श्रीकाकुलम जिले के जियोनिपेट का रहने वाला है।

उसने वारंगल के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (आरईसी) से स्नातक किया था। अब यह संस्थान नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलोजी हो गया है। वह 21 जनवरी 1980 में केवल एक बार ही गिरफ्तार हुआ था, जब रेडिकल स्टूडेंट यूनियन (आरएसयू) में आपसी विवाद हो गया था। इसके बाद से कई बार वह पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा है। उसपर आंध्रप्रदेश सरकार ने 50 लाख रुपये का इनाम रखा है।

वर्ष 2003 में गणपति ने पार्टी की कमान संभाली थी। कमान संभालने के बाद देश भर में माओवाद चरम पर पहुंच गया था। गणपित की रणनीति थी कि देश में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म हो, कारपोरेट दमन, किसानों पर जुल्म के विरुद्ध आंदोलन खड़ा हो।

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