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नई दिल्ली
भारतीय सेना की ताकत में और इजाफा होने जा रहा है। सेना के बेड़े में एम-777 अल्ट्रालाइट होवित्जर तोप और K-9 वज्र तोप शामिल होने जा रही हैं। आज महाराष्ट्र के देवलाली में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत इन तोपों को आधिकारिक तौर पर सेना में शामिल किया। आधुनिक तकनीक से लैस ये हॉवित्जर तोप रासायनिक-जैविक खतरे को भांपने में सक्षम है।

इनके शामिल होने से भारतीय सेना की क्षमता बढ़ेगी। कहा जा रहा है कि पहले इन तोपों को पहले ही भारतीय सेना के बेड़े में शामिल किया जाना था। कुछ तकनीकी वजहों से इन्हें अब सेना को दिया जा रहा है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक K-9 वज्र को साउथ कोरिया की कंपनी हनवहा टेक विन ने मेक इन इंडिया के तहत तैयार किया है।

साल 2020 तक 100 K-9 वज्र तोप भारतीय सेना के पास होंगी। इस प्रोजेक्ट के तहत सेना को 10 तैयार तोपें मिलेंगी, जबकि 90 का निर्माण मेक इन इंडिया के तहत होगा।बताया जाता है कि K-9 वज्र तोप 39 किमी तक अचूक निशाना लगाकर दुश्‍मन को मिटाने की क्षमता रखती है, यह तोप दिन और रात में कभी भी फायर करने में सक्षम बताई जाती है।

K-9 वज्र तोप तीन सेकेंड में तीन गोले दागने में सक्षम है। यह बख्तरबंद तोप 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से दौड़ सकती है और ये तोप रेगिस्तानी इलाकों में भी चलने में सक्षम बताई जा रही है।
वहीं भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजीमेंट में वर्ष 2021 तक करीब 145 M-777 तोपें शामिल होंगी। इसका वजन मात्र 4.2 टन है। यह तोप 31 किमी तक एक मिनट में चार राउंड फायर कर सकती है और इसका गोला 45 किलो का बताया जाता है।

कहा जा रहा है कि इनको भारत-पाकिस्तान और चीन की सरहद पर तैनात किया जाएगा इन्हें अत्यधिक ऊंचाई से लेकर रेगिस्तान या फिर पहाड़ से लेकर बर्फीले पहाड़ों पर तैनात किया जा सकता है।

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