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एक फ़िल्म का सीन है। एक सुपारी किलर को जेल में बंद आदमी का मर्डर करने की सुपारी मिली है। जाहिर है इसके लिए जेल जाना जरूरी है।

ऐसे में सुपारी किलर को आइडिया आता है वो थानेदार से खुद को अंदर करने की रिक्वेस्ट करता है। थानेदार मना करता है तो वह किलर थानेदार के गाल में दो चार थप्पड़ ऐसे रसीद करता है कि थानेदार को उस किलर को तुरंत जेल में डालने का आदेश देना पड़ता है।

अब यह सीन हूबहू तो नहीं लेकिन मंशा के स्तर पर काफी हद तक मिलता-जुलता दोहराया गया लालू प्रसाद यादव प्रकरण में। क्योंकि चारा घोटाले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दो सहायक जेल में भी उनकी सेवा के लिए पहुंच चुके हैं। यहां मामला किलर का नहीं सेवकों का है लेकिन अंदर जाने का तरीका वैसा ही है।

इन दोनों सहायकों ने एक फर्जी मामले में सरेंडर कर खुद को उसी दिन गिरफ्तार करवाया जिस दिन लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के लिए दोषी करार दिया गया। ये दावा पुलिस का है और फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

जाहिर है इतना बड़ा संयोग हो नहीं सकता और बिना मिलीभगत के ऐसा संभव नहीं है कि लालू की सेवा करने वाले ये वफादार उसी दिन जेल पहुँच गए जिस दिन लालू को सजा सुनाई गई।

इन दो में से एक का नाम मदन यादव है, जो दो गोशाला, एक घर और एसयूवी वाहन का मालिक है। रांची का रहने वाला मदन यादव फिलहाल किसी सुमित यादव नाम के शख्स से 10000 रुपये छीनने के आरोप में बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।

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इस मामले में कथित तौर पर उनकी मदद दोस्त लक्ष्मण यादव ने की है, जो खुद भी उसी जेल में बंद हैं। हालांकि आरजेडी इन दोनों को लालू का सहायक न मानते हुए पार्टी का कार्यकर्ता बता रही है।

पुलिस के दावों के मुताबिक देखें तो यह मामला बेहद रोचक हो गया है। दरअसल जब सुमित नाम के शख्स ने 23 दिसंबर को मदन और लक्ष्मण के खिलाफ केस दर्ज कराया तो पुलिस के पास संदेह की कोई वजह नहीं थी। इसी दिन लालू को चारा घोटाले में कोर्ट ने दोषी ठहराया था। मदन और लक्ष्मण, दोनों ही आरोपियों ने उसी दिन सरेंडर भी किया और दोनों को बिरसा मुंडा जेल भेज दिया गया।

मदन की आर्थिक हालत काफी अच्छी है। उन्हें चोरी या लूटपाट करने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि मदन निश्चित तौर पर लालू की सेवा के लिए ही जेल गए हैं।

अब ये सब तो किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा लग रहा है जहां मालिक को सजा मिलते ही सेवक भी जेल पहुंच जाते हैं। सारा माजरा देखकर यही लग रहा की वफादारी हो यो लालू के इन सेवकों जैसी, वरना न हो।

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