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बीते कुछ समय से बच्चों के साथ अपराध और हादसों की बढ़ती तादाद देखी गयी है जो कि पूरे देश और समाज के लिए चिंता का विषय है। जिस तरह से अपराध और दुर्घटनाओं का शिकार होकर मासूम अपनी जान गँवा रहे हैं, ये अपने बच्चों के प्रति हमारी लापरवाह नीतियों और लचर कानून व्यवस्था की पोल खोल देता है।

हाल की घटना में कुशीनगर में स्कूली वैन हादसे में 13 बच्चों की मौत हो गई है, इसमें ड्राइवर की लापरवाही का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ड्राइवर कान में ईयरफोन लगाए हुए था जिस वजह से उसे ट्रेन के आने की आवाज सुनाई नहीं दी और वैन ट्रेन की चपेट में आ गई।

गौरतलब है कि गुरुवार सुबह कुशीनगर के विशुनपुरा थाने के दुदही रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूल वैन के थावे-बढ़नी पैसेंजर ट्रेन से टकराने के चलते 13 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बारे में रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्कूल वैन का ड्राइवर कान में ईयरफोन लगाए हुए था।

जब वैन दुदही मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग से गुजर रही थी तब वहां तैनात गेट मित्र ने वैन के ड्राइवर को आगे न बढ़ने के लिए इशारा भी किया लेकिन ड्राइवर ने ध्यान नहीं दिया। स्थानीय नागरिकों ने भी यही बात कही।

वे आगे कहते हैं कि ड्राइवर कान में ईयरफोन लगाए हुए थे। बच्चे चीखते-चिल्लाते रहे लेकिन ड्राइवर ने आवाज को दरकिनार कर दिया जिस वह से यह भीषण हादसा हुआ। हादसे में कई बच्चों के घायल होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि वैन में करीब 25 बच्चे सवार थे।

वहीं स्कूल वैन डिवाइन पब्लिक स्कूल की थी। हादसा इतना भयानक था कि आवाजें दूर-दूर तक सुनी गईं। वैन के परखचे उड़ गए। आसपास के लोग चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। पुलिस और प्रशासन को तुरंत ही सूचना दी गई।

आपको बता दें कि इस हादसे पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने हादसे में मारे गए बच्चों के परिजनों को दो लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की घोषणा की है। हादसे की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। खुद सीएम योगी कुशीनगर में मृतकों के परिजनों से मिलने जा रहे हैं।

लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ मुआवजा देने भर से यह मामला ख़त्म हो जता है? क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है कि जरा से दुःख और मुआवजे से हम चुप हो जाएँ?

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