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कर्नाटक विधानसभा  चुनाव तो खत्म हो गए हैं लेकिन सरकार बनाने के लिए जिस जादुई आंकड़े को छूना होता है उसके लिए घमासान मचा है। इसके लिए बीजेपी और कांग्रेस-जेडीएस में जद्दोजहद शुरू हो गई है। बीजेपी विधायक दल का नेता चुने जाने के फौरन बाद येदियुरप्पा समेत पार्टी के नेताओं ने राजभवन जाकर गवर्नर से मुलाकात की। 104 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। मजेदार बात यह है कि दोनों ही पक्ष सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं, ऐसे में अब सबकी नजरें गवर्नर वजुभाई के फैसले पर टिकी हैं कि वह किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं।

हालांकि इस पूरे खेल में बीजेपी कुछ ज्यादा ही हमलावर हो रही है और जोड़तोड़ के खेल को अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ रही है। शायद इसीलिए इस बीच, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी उनके विधायकों से संपर्क साध रही है। बीजेपी से अपने विधायकों को बचाने के लिए कांग्रेस ने प्लान भी तैयार कर लिया है। साथ ही कांग्रेस ने किसी भी तरह की फूट से साफ इनकार किया है।

गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने  कहा, ‘सबसे बड़ी पार्टी के पास पर्याप्त संख्या नहीं है। बीजेपी के पास 104 विधायक हैं और हमारे (कांग्रेस और JDS) के पास 117 हैं। गवर्नर पक्ष नहीं ले सकते हैं। क्या ऐसा व्यक्ति, जो संविधान को बचाने के लिए हैं वह खुद उसपर चोट करेगा। गवर्नर को अपने सभी पुराने संबंधों को अलग रखना चाहिए, जो उनके बीजेपी या आरएसएस के साथ रहे हैं।’

जाहिर है उनका इशारा पक्षपात को लेकर है। वे आगे कहते हैं कि ‘जेडीएस को अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है। कोई भी नहीं जाएगा, बीजेपी जो भी चाहती है उसे कोशिश करने दीजिए।’

दूसरी तरफ के तरह की अफवाहों का बाजार गर्म है। खबरें हैं कि कुमारस्वामी को सीएम पद दिए जाने से कांग्रेस के कुछ लिंगायत विधायक नाराज हैं। इस पर सिद्धारमैया ने कहा, ‘कांग्रेस के सभी विधायक एकसाथ है। कोई भी मिसिंग नहीं है। हम सरकार बनाने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं।’

कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार ने भी आरोप लगाया कि बीजेपी हमारे विधायकों से संपर्क कर रही है, हमें इसकी जानकारी मिली है। काफी दबाव है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है क्योंकि दो पार्टियों के पास पर्याप्त संख्या है।

हालांकि सत्ता के इस खेल में बड़ा सवाल यह है कि 104 सीटें जीतने वाली बीजेपी 112 के जादुई आंकड़े को कैसे हासिल करेगी? सरकार कोई भी बनाये लेकिन इसके लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को खराब न करे।

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